मोक्ष तीर्थ कॉरिडोर: काशी के सबसे प्राचीन मणिकर्णिका घाट का हो रहा भव्य कायाकल्प
काशी की पावन भूमि पर स्थित मणिकर्णिका घाट — जो सदियों से मोक्ष प्राप्ति का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है — अब मोक्ष तीर्थ कॉरिडोर परियोजना के तहत एक ऐतिहासिक बदलाव से गुजर रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य घाट के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाना है, साथ ही उसकी आध्यात्मिक पहचान को पूरी तरह संरक्षित रखना है। निर्माण कार्य में राफ्ट फाउंडेशन तकनीक का उपयोग करते हुए एक अत्याधुनिक शवदाह गृह बनाया जा रहा है। इस नई इमारत की सबसे अहम विशेषता होगी ऊंची चिमनियों का निर्माण, जो दाह संस्कार के धुएं को ऊपर की ओर मोड़ेंगी। अब तक इस धुएं ने काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रसिद्ध गंगा द्वार के गुलाबी चुनार पत्थर को काला कर दिया था — यह समस्या अब दूर होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। घाट की सीढ़ियों पर छायादार ढांचे लगाए गए हैं ताकि पूजा-पाठ और कर्मकांड करने वाले परिवारों को कड़ी धूप या बारिश से राहत मिले। छोटे बच्चों वाली माताओं के लिए बेबी फीडिंग रूम की व्यवस्था भी की गई है — एक ऐसा आधुनिक कदम जो इस परियोजना की जन-केंद्रित सोच को दर्शाता है। जेठ महीने की भीषण गर्मी में भी सुबह सात बजे से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहती हैं। मौसम चाहे कोई भी हो — ठंड, गर्मी या बरसात — आस्था के आगे सब फीका पड़ जाता है। चुनार पत्थर से घाटों का सौंदर्यीकरण और पास ही स्थित नेपाली मंदिर — जिसे 'बनारस का मिनी खजुराहा' कहा जाता है — के साथ मिलकर मोक्ष तीर्थ कॉरिडोर काशी की प्राचीन विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम बन रहा है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: ANISH VERMA