वाराणसी के प्रसिद्ध घाट
वाराणसी के घाट शहर की आत्मा हैं, जहाँ पवित्र गंगा प्राचीन अनुष्ठानों से मिलती है।
पढ़ने में 11 मिनट
6.8 किमी में फैले 84 घाटों के साथ, ये नदी की सीढ़ियाँ अग्नि दाह से लेकर शांत सूर्योदय तक सब कुछ होस्ट करती हैं। हमारे गाइड में गोता लगाएँ!
मुख्य घाट आँकड़े
क्षेत्र के अनुसार शीर्ष घाट
व्यस्त दशाश्वमेध क्षेत्र में, दशाश्वमेध घाट, मुंशी घाट, डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट, प्रयाग घाट और दरभंगा घाट जैसे प्रतिष्ठित स्थान शाम की आरतियों के लिए भीड़ खींचते हैं। पास में, मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट शाश्वत दाह स्थल के रूप में कार्य करते हैं, जो मोक्ष का प्रतीक हैं।
दक्षिणी लंका और अस्सी क्षेत्र शांत भागने की सुविधा देते हैं: अस्सी घाट (अस्सी गंगा संगम तट और वाराणसी अस्सी घाट सहित) सुबह-ए-बनारस योग होस्ट करता है, जबकि तुलसी घाट, रविदास घाट, अघोरेश्वर घाट और स्वामी विवेकानंद घाट साहित्यिक और संत vibes प्रदान करते हैं।
उत्तरी राजघाट में आदि केशव घाट, राज घाट, खिड़किया घाट और आदि केशव घाट—प्राचीन मंदिरों के साथ इतिहास प्रेमियों के लिए सही। मदनपुरा के रत्नों में केदार घाट, निरंजनी घाट, पंचकोट घाट, जानकी घाट, गंगा महल घाट और आनंदमयी घाट भक्ति स्नान के लिए शामिल हैं।
सामान्य घाट क्षेत्र पंचगंगा घाट, बुंदी पारकोटा घाट, नया घाट, लाल घाट, राजा ग्वालियर घाट, शीतला घाट, चौकी घाट, संकटा घाट, त्रिलोचन घाट, मानसरोवर घाट, ब्रह्म घाट और गाय घाट को हाइलाइट करता है—प्रत्येक में ऐतिहासिक स्थलों या फिटनेस स्पॉट जैसी अनोखी उपश्रेणियाँ।
प्रसिद्ध घाट स्पॉटलाइट
दशाश्वमेध घाट वाराणसी गंगा आरती से धड़कता है; पास के पांडेय घाट और पांडेय घाट, वाराणसी स्थानीय स्नान होस्ट करते हैं। तुलसी घाट कवि तुलसीदास को सम्मानित करता है, जबकि मन मंदिर घाट में एक वेधशाला है। केदार घाट की दक्षिण भारतीय वास्तुकला चमकती है, और हनुमान घाट (कई स्पॉट) पहलवानों को आकर्षित करता है। राजघाट वाराणसी और राज घाट पुल दृश्य प्रदान करते हैं; मीर घाट और मीर घाट शांत प्रार्थनाओं के लिए हैं। चौसठी घाट और चौसठी घाट 64 योगिनी मंदिरों का दावा करते हैं। दांडी घाट योगी आश्रय है, जैन घाट जैन धर्म को नमन करता है, और वराही घाट देवी वराही को। ललिता घाट, त्रिपुराभैरवी घाट, क्षमेश्वर घाट, वीर भारद्रा मिश्रा घाट, महानिर्वाणी घाट, पंचगंगा घाट, कर्नाटक राज्य घाट, शीतला घाट और सकका घाट विविध अनुष्ठानों के लिए न चूकें।
यात्रा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय
व्यावहारिक जानकारी
कैसे पहुँचें
वाराणसी जंक्शन से ऑटो-रिक्शा (₹100-200); राज घाट से अस्सी तक नाव (₹500/घंटा)।
प्रवेश शुल्क
अधिकांश के लिए मुफ्त; नाव सवारी ₹200-1000 समूह आकार पर निर्भर।
सर्वश्रेष्ठ मौसम
अक्टूबर-मार्च; मानसून में बाढ़ से बचें।
पास के भोजन
दशाश्वमेध पर कचौड़ी; केदार घाट के पास ठंडाई।
स्थानीय सुझाव
शरद 2026 अपडेट: घाटों पर क्या नया है
सितंबर 2026 में अद्यतन। वाराणसी का गंगा तट लगातार बदल रहा है, इसलिए इस मौसम में आने वाले यात्रियों के लिए कुछ ज़रूरी बातें। सबसे नया और सबसे बड़ा घाट है नमो घाट, जो राजघाट के दक्षिण में पुराने खिड़किया घाट की जगह बनाया गया है। यहाँ चौड़े पक्के रास्ते, "नमस्ते" मुद्रा की विशाल मूर्तियाँ, सीएनजी नावों के लिए तैरती जेट्टी, फूड कोर्ट और बिना सीढ़ियों वाला रास्ता है, जिससे यह व्हीलचेयर उपयोग करने वालों और बुज़ुर्गों के लिए शहर का सबसे सुविधाजनक घाट बन गया है। लंबी नौका यात्राएँ और क्रूज़ अब प्रायः यहीं से शुरू होते हैं, इसलिए बुकिंग करते समय जाँच लें कि नाव दशाश्वमेध से चलेगी या नमो घाट से।
पुराने घाटों पर भी बदलाव दिख रहे हैं। अधिकांश नावें अब सीएनजी इंजन से चलती हैं, जिससे शोर और धुआँ कम हुआ है, और मानसून के बाद घाटों की सफ़ाई पहले से अधिक व्यवस्थित ढंग से होती है। दशाश्वमेध घाट सीधे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से जुड़ा है, इसलिए मंदिर दर्शन और शाम की गंगा आरती अब एक ही पैदल यात्रा में, बिना गलियों में दोबारा घूमे, पूरी की जा सकती है।
मानसून का जलस्तर और अक्टूबर में घाटों का फिर से खुलना
हर साल जुलाई के अंत से सितंबर के मध्य तक गंगा का जलस्तर कई मीटर बढ़ जाता है, और 2026 में भी नदी अधिकांश घाटों की निचली सीढ़ियों के ऊपर चढ़ गई। इन हफ़्तों में नदी किनारे एक घाट से दूसरे घाट तक पैदल चलना संभव नहीं होता, जलस्तर ख़तरे के निशान के पार जाने पर नौका विहार रोक दिया जाता है, और शाम की गंगा आरती ऊपरी चबूतरों या पास की छतों पर होती है। यदि आप सितंबर के अंत में यह पढ़ रहे हैं, तो समझिए कि पानी अब उतर रहा है। सबसे पहले निचली सीढ़ियाँ बाहर आती हैं, फिर नगर निगम की टीमें और स्वयंसेवक जमी हुई गाद को धोते हैं, और अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक पूरा गंगा तट फिर से खुल जाता है। तब से मार्च तक घाटों का असली मौसम है: ठंडी सुबहें, साफ़ रोशनी और हर सीढ़ी खुली। अक्टूबर से पहले यात्रा कर रहे हों तो हमारी वाराणसी में मानसून गाइड ज़रूर देखें।
घाटों पर त्योहारों का मौसम 2026
शरद ऋतु में घाट सबसे अधिक जीवंत होते हैं, और 2026 की तिथियाँ एक ही यात्रा में कई उत्सव देखने का अवसर देती हैं:
- शारदीय नवरात्रि, 11 से 19 अक्टूबर 2026, और विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर को। घाटों के पीछे की गलियों में दुर्गा पंडाल सजते हैं और अंतिम दिनों में घाटों पर मूर्ति विसर्जन होता है। विस्तार से पढ़ें हमारे नवरात्रि 2026 पृष्ठ पर।
- रामनगर की रामलीला नवरात्रि के पखवाड़े भर नदी के उस पार रामनगर किले में चलती है, और दक्षिणी घाटों से नाव द्वारा पार जाने वालों की भीड़ शाम को सबसे अधिक रहती है।
- दीपावली, 8 नवंबर 2026: घाट और नदी किनारे के मंदिर दीयों से जगमगाते हैं और शाम की आरती सामान्य से भव्य होती है।
- देव दीपावली, 24 नवंबर 2026 (कार्तिक पूर्णिमा): अस्सी से राजघाट तक सभी 84 घाटों पर दस लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। यह गंगा तट की सबसे भव्य और सबसे भीड़ भरी रात है। होटल और नावें हफ़्तों पहले भर जाती हैं, इसलिए जल्दी बुकिंग करें और हमारी देव दीपावली 2026 गाइड पढ़ें।
दक्षिण से उत्तर: प्रमुख घाटों का पैदल मार्ग
घाटों को देखने का सबसे अच्छा तरीका है भोर में दक्षिणी छोर से नदी किनारे पैदल चलना। चाय के ठहरावों के साथ पूरे मार्ग के लिए तीन से चार घंटे रखें।
अस्सी घाट से केदार घाट (शांत दक्षिण)
यात्रा अस्सी घाट से शुरू करें, जहाँ सुबह-ए-बनारस की प्रातः आरती और योग होता है। फिर उत्तर की ओर तुलसी घाट तक चलें, जहाँ माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के अंश रचे थे और जहाँ का अखाड़ा आज भी भोर में अभ्यास करता है। आगे धारीदार चेत सिंह घाट है, जिसका किला 18वीं सदी में बनारस के राजा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई लड़ाई की याद दिलाता है। इसके बाद लाल-सफ़ेद धारियों वाला केदार घाट आता है, जहाँ का दक्षिण भारतीय शैली का शिव मंदिर सोमवार को विशेष रूप से भरा रहता है।
हरिश्चंद्र घाट से दशाश्वमेध घाट (व्यस्त केंद्र)
हरिश्चंद्र घाट दो श्मशान घाटों में छोटा है; यहाँ से शांतिपूर्वक गुज़रें और कैमरा नीचे रखें। इसके बाद पांडेय, मुंशी और दरभंगा घाट आते हैं, जो नदी किनारे के सबसे अधिक फ़ोटो खींचे जाने वाले महल हैं और 18वीं-19वीं सदी में विभिन्न रियासतों के राजघरानों ने बनवाए थे। फिर आप दशाश्वमेध घाट पहुँचते हैं, जो शहर का धार्मिक केंद्र और मुख्य शाम की आरती का मंच है।
मणिकर्णिका घाट से नमो घाट (पवित्र उत्तर)
फूल बेचने वालों और सवाई जयसिंह द्वितीय की मानमंदिर वेधशाला से आगे मणिकर्णिका घाट है, जहाँ की चिता की आग सदियों से बिना रुके जलती मानी जाती है। इसके बाद सिंधिया घाट आता है, जिसका नदी में झुका हुआ आधा डूबा शिव मंदिर प्रसिद्ध है, और फिर पंचगंगा घाट, जहाँ आलमगीर मस्जिद के नीचे पाँच नदियों का संगम माना जाता है। त्रिलोचन, गाय और राजघाट का अंतिम हिस्सा शांत और स्थानीय है, और यात्रा नमो घाट के खुले विस्तार पर समाप्त होती है, जहाँ से आप अस्सी लौटने के लिए नाव ले सकते हैं।
नौका विहार: 2026 में किराया और विकल्प
घाटों पर नाव का किराया मोल-भाव पर निर्भर है और त्योहारों के दिनों में तेज़ी से बढ़ता है। इस मौसम के मोटे अनुमान के अनुसार सूर्योदय के साझा नाव चक्कर में प्रति व्यक्ति लगभग 100 से 200 रुपये, एक घंटे की निजी चप्पू वाली नाव प्रायः 800 से 1,500 रुपये (नाविक और आपके मोल-भाव पर निर्भर), और मोटरबोट इससे अधिक। नमो घाट से चलने वाले बड़े सीएनजी क्रूज़ और डबल-डेकर नावों का किराया निश्चित और प्रकाशित होता है। नाव में बैठने से पहले किराया, समय और वापसी का घाट तय कर लें और छोटे नोट साथ रखें। मार्ग और समय के अनुसार पूरा विवरण हमारी वाराणसी नौका विहार गाइड में है।
घाटों पर सुरक्षा और शिष्टाचार
- सीढ़ियाँ घिसकर चिकनी हो गई हैं और गीली होने पर बहुत फिसलन भरी होती हैं, इसलिए पकड़ वाले जूते पहनें, विशेषकर मानसून के बाद के हफ़्तों में।
- नदी में तैरें नहीं। सतह शांत दिखने पर भी धारा तेज़ होती है और सीढ़ियों के पास ही गहराई अचानक बढ़ जाती है।
- मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर दाह संस्कार की फ़ोटो न लें, ऊँची आवाज़ में बात न करें, और दान के बदले "रस्में समझाने" की पेशकश करने वालों को विनम्रता से मना करें।
- शाम को दशाश्वमेध के आसपास दलाल और बिना लाइसेंस के गाइड घूमते हैं। दृढ़ और विनम्र "नहीं, धन्यवाद" कहें और आगे बढ़ जाएँ।
- घाटों पर किसी भी मंदिर के चबूतरे पर चढ़ने से पहले जूते उतारें, और बैठते समय पैर नदी या मंदिर की ओर न रखें।
- अपना कचरा साथ ले जाएँ। मुख्य घाटों पर अब कूड़ेदान लगे हैं और नदी में कचरा फेंकने पर जुर्माना लगता है।
कुछ और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंचतीर्थी के पाँच घाट कौन से हैं?
अस्सी, दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, पंचगंगा और आदि केशव। तीर्थयात्री पारंपरिक रूप से एक ही दिन में दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ते हुए इन पाँचों घाटों पर स्नान करते हैं और यात्रा आदि केशव मंदिर पर समाप्त करते हैं, जहाँ वरुणा नदी गंगा से मिलती है।
क्या मानसून में घाटों का पैदल मार्ग खुला रहता है?
आमतौर पर जुलाई के अंत से सितंबर के अंत तक नहीं, क्योंकि निचली सीढ़ियाँ पानी में डूबी रहती हैं और घाटों को जोड़ने वाले रास्ते कट जाते हैं। तब घाटों के ऊपर की गलियों का उपयोग करें और नाव की योजना बनाने से पहले उस दिन का जलस्तर जाँच लें।
देव दीपावली के लिए कौन सा घाट सबसे अच्छा है?
दशाश्वमेध और राजेंद्र प्रसाद घाट पर सबसे बड़ी सजावट और सबसे बड़ी भीड़ होती है। दीयों का अधिक आरामदायक दृश्य चाहिए तो सूर्यास्त से लगभग एक घंटा पहले अस्सी और पंचगंगा के बीच नाव लें, या तुलसी और चेत सिंह घाट के पास के दक्षिणी घाटों से देखें।
घाटों के लिए कितने दिन चाहिए?
एक पूरा दिन पैदल यात्रा, सूर्योदय की नौका और शाम की आरती के लिए पर्याप्त है। दो दिन हों तो नदी पार रामनगर किला, गलियों की हेरिटेज वॉक और किसी दूसरे घाट से एक और शांत सूर्योदय जोड़ सकते हैं।
क्या घाटों पर प्रवेश शुल्क है?
नहीं, सभी 84 घाट पूरी तरह निःशुल्क और दिन-रात खुले हैं। केवल नाव, गाइड और कुछ मंदिरों के विशेष दर्शन के लिए भुगतान करना पड़ता है।