बीएचयू में योग की रौनक, वैश्विक मित्रों के साथ साझा हुआ प्राचीन ज्ञान
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में सात दिनों का योग कार्यक्रम आरंभ हो चुका है जिसमें लंदन और त्रिनिदाद जैसे दूरस्थ स्थानों से आए प्रतिभागी उत्साहपूर्वक शामिल हो रहे हैं। सभी शास्त्रीय कपालभाति की सांसों की क्रिया सीख रहे हैं जो वाराणसी की स्वास्थ्य परंपरा का अभिन्न अंग रही है। गंगा किनारे बसी यह प्राचीन नगरी सदियों से साधकों का स्वागत करती रही है और योग यहां की आध्यात्मिक लय में सहज रूप से समाहित हो जाता है। यह आयोजन दर्शाता है कि हमारा शहर अपनी प्राचीन विद्या को विश्व के साथ कैसे साझा करता रहता है। मेहमान यहां स्थानीय परंपराओं से जुड़ते हैं और योग को आसानी से समझ पाते हैं जिससे यह पर्यटक स्थलों से आगे बढ़कर सच्चे सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम बन जाता है। वाराणसी में ऐसे अनुभव अतिथियों को सतही भ्रमण से आगे ले जाते हैं और उन्हें उन विधियों से परिचित कराते हैं जिन्हें स्थानीय लोग पीढ़ियों से संजोए हुए हैं। निवासियों के लिए ऐसे कार्यक्रम कैंपस के आसपास सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं। वे सांसों के व्यायाम और mindful movement की सरल शक्ति याद दिलाते हैं जो हमारी व्यस्त दिनचर्या में स्वास्थ्य और शांति बनाए रखने में मदद करते हैं। चाहे कोई घाटों के पास रहता हो या विश्वविद्यालय की दीवारों के भीतर अध्ययन करता हो ये सत्र नवीनीकरण की अनुभूति देते हैं जो शहर की कालजयी गति के अनुरूप होती है। चाहे आप लंबे समय से बनारसी हों या पहली बार आए हों यहां योग का अभ्यास शहर की शांत भावना से जुड़ने का सुंदर तरीका है। इसी तरह के सामुदायिक सत्रों पर नजर रखें जो इस परंपरा को जीवंत और समावेशी बनाए रखते हैं। वाराणसी का खुला हृदय सुनिश्चित करता है कि हर कोई तरोताजा और जुड़ा हुआ महसूस करके लौटे।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Amar Ujala — Varanasi (HI)