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यात्रा6 दिन पहले

काशी में आकार ले रही देश की पहली शहरी रोपवे, घाटों तक पहुँचना होगा और आसान

वाराणसी की सबसे महत्वाकांक्षी परिवहन परियोजनाओं में से एक धीरे-धीरे आकार ले रही है — काशी रोपवे, जिसे देश की पहली शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे के रूप में तैयार किया जा रहा है। कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र को गोदौलिया से जोड़ने के लिए बनाई जा रही करीब 3.75 किलोमीटर लंबी यह केबल-कार लाइन गोदौलिया — जो काशी विश्वनाथ धाम और घाटों के पास है — तक निवासियों और पर्यटकों दोनों को आवाजाही का एक नया, सहज साधन देगी। इसका आकर्षण सीधा है। कैंट और गोदौलिया के बीच का रास्ता व्यस्त समय में, ख़ासकर पर्व के दिनों में जब गलियाँ श्रद्धालुओं से भर जाती हैं, बेहद धीमा हो जाता है। ट्रैफ़िक के ऊपर से गुज़रती यह रोपवे इस सफ़र को लगभग एक घंटे से घटाकर करीब पंद्रह मिनट तक ला सकती है, और नीचे की सड़कों पर दबाव भी कम करेगी। 2026 के दौरान की ख़बरें बताती हैं कि परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है और मार्ग पर टावर व स्टेशन बन रहे हैं। यात्रियों के लिए यह घाटों तक पहुँचने का आसान और आरामदेह रास्ता होगा, और शहर के लिए एक स्वच्छ, कुशल परिवहन विकल्प, जो अपने ऐतिहासिक स्वरूप को सहेजते हुए काशी के आधुनिकीकरण से मेल खाता है। अगर यह अपने वादे पर खरी उतरी, तो बनारस की छतों के ऊपर से एक छोटी, मनोरम सवारी घाटों की यात्रा शुरू करने का एक यादगार तरीक़ा बन सकती है। योजना बनाने से पहले खुलने की तारीख़ों के लिए स्थानीय अपडेट अवश्य देखते रहें।

India's 1st urban ropeway in Varanasi nears completionपूरा अपडेट पढ़ें

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आईआईटी (बीएचयू) में स्नातकोत्तर के सपने: एमटेक, एमफार्म और पीएचडी 2026-27 के आवेदन शुरू
शिक्षा14 घंटे पहले

आईआईटी (बीएचयू) में स्नातकोत्तर के सपने: एमटेक, एमफार्म और पीएचडी 2026-27 के आवेदन शुरू

शोध या मास्टर्स की राह चुनने वाले विद्यार्थियों के लिए घर पर ही एक उपयोगी अवसर खुला है: आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी अपने एमटेक, एमफार्म और पीएचडी कार्यक्रमों में 2026-27 के विषम सेमेस्टर में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन ले रहा है। काशी और आसपास के अभ्यर्थियों के लिए इसे जल्दी नोट कर लेना ठीक रहेगा। आईआईटी (बीएचयू) देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में से एक है — एनआईआरएफ 2025 में इंजीनियरिंग में 10वें स्थान पर और वैश्विक विश्वविद्यालय सूचियों में अग्रणी नामों में शामिल — इसलिए यहाँ स्नातकोत्तर सीट का मतलब है पूर्वी यूपी छोड़े बिना विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएँ और मार्गदर्शन। ख़ासकर एमफार्म का रास्ता क्षेत्र के फार्मेसी स्नातकों के लिए बेहतरीन विकल्प है। अगर आप आवेदन की सोच रहे हैं, तो सलाह सीधी है: सटीक पात्रता, ज़रूरी अर्हता अंक और आवेदन की अंतिम तिथि के लिए संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट देखें, और दस्तावेज़ आख़िरी क्षण की बजाय पहले से तैयार रखें। ऐसे अवसर जल्दी बंद हो जाते हैं। यह याद दिलाने वाली बात है कि विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा सिर्फ़ महानगरों में नहीं — यह यहीं बीएचयू परिसर में है। चाहे आप बीटेक कर रहे हों, बीफार्म या विज्ञान में स्नातक — यह देखने का अच्छा समय है कि इनमें से कोई कार्यक्रम आपकी योजनाओं में फिट बैठता है या नहीं।

Shiksha — IIT (BHU) admissions 2026अपडेट खोलें
बीएचयू से सुनहरा मुक्का: काशी की तीन मुक्केबाज़ों ने रीजनल सब-जूनियर चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण
खेल14 घंटे पहले

बीएचयू से सुनहरा मुक्का: काशी की तीन मुक्केबाज़ों ने रीजनल सब-जूनियर चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण

काशी को जश्न मनाने के लिए तीन नई मुक्केबाज़ी चैंपियन मिली हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्र (SAI STC, BHU) की खिलाड़ी सहारनपुर में हुई सब-जूनियर रीजनल मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप से स्वर्ण पदक लेकर लौटीं। विजेता — अंडर-37 किग्रा में आकांक्षा, अंडर-46 किग्रा में संध्या यादव और अंडर-52 किग्रा में खुशी तिवारी — ने अपने-अपने भार वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया। वाराणसी लौटने पर स्थानीय मुक्केबाज़ी संघ ने युवा खिलाड़ियों का स्वागत किया, और केंद्र के प्रभारी शुभांशु द्विवेदी सहित प्रशिक्षक पूजा यादव, रमेश शर्मा और नरेंद्र बिष्ट ने उन्हें जीत की बधाई दी। यह शहर के ज़मीनी खेल के लिए गर्व का पल है। बीएचयू का साई केंद्र चुपचाप युवा प्रतिभाओं की नर्सरी बन गया है, और ऐसे नतीजे दिखाते हैं कि अनुशासित और अच्छे प्रशिक्षण से काशी और आसपास की बेटियाँ क्या कर सकती हैं। सब-जूनियर पदक वही शुरुआती जीत हैं जो आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक के रास्ते खोलती हैं। आकांक्षा, संध्या और खुशी — और उनके पीछे खड़े प्रशिक्षकों — को बधाई। अगर आपके बच्चे का सपना रिंग में उतरने का है, तो ऐसी कहानियाँ याद दिलाती हैं कि एक गंभीर प्रशिक्षण-राह यहीं वाराणसी में मौजूद है।

Amar Ujala — Varanasi (BHU-SAI boxers win gold)अपडेट खोलें
पंजाब तक आरामदेह रात का सफर? वाराणसी–जालंधर वंदे भारत स्लीपर की तैयारी
यात्रा14 घंटे पहले

पंजाब तक आरामदेह रात का सफर? वाराणसी–जालंधर वंदे भारत स्लीपर की तैयारी

काशी के लंबी दूरी के यात्रियों के लिए अच्छी ख़बर पटरी पर हो सकती है: रिपोर्टों के अनुसार रेलवे वाराणसी–जालंधर वंदे भारत स्लीपर सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश को दिल्ली और पंजाब की ओर एक आधुनिक रात्रि रेल-कड़ी देगी। प्रस्ताव के अनुसार यह ट्रेन सप्ताह के सातों दिन चलेगी और दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन से होकर गुज़रेगी, जिससे दिल्ली, पंजाब और आगे जम्मू की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए तेज़ और सुगम रास्ता खुलेगा। वंदे भारत स्लीपर रेक आरामदेह बर्थ, बेहतर सुविधाओं और बढ़ी हुई सुरक्षा के साथ बनते हैं — काम, पढ़ाई, तीर्थ या परिवार से मिलने जाने वालों के लिए स्वागतयोग्य सुधार। योजना बनाने से पहले एक सावधानी: अधिकारियों ने अभी न तो शुरुआत की तारीख़ घोषित की है और न ही अंतिम मार्ग की पुष्टि की है। अब तक जो हुआ है वह तैयारी भर है — हाल ही में वरिष्ठ रेल और ज़िला अधिकारियों ने स्टेशन का निरीक्षण कर यात्री सुविधाओं और तैयारी की समीक्षा की। इसलिए इसे एक उम्मीद भरा संकेत मानें, तय समय-सारणी नहीं। वाराणसी जैसे रेल से भरपूर जुड़े शहर के लिए उत्तर-पश्चिम की ओर एक समर्पित स्लीपर वाकई उपयोगी होगी। आधिकारिक घोषणा होते ही हम पाठकों को तारीख़ और ठहराव की जानकारी देंगे।

DNP India — Varanasi–Jalandhar Vande Bharat Sleeperअपडेट खोलें
काशी में स्वाद का उत्सव: इस जुलाई वाराणसी में यूपी फूड एक्सपो, राष्ट्रीय खाद्य एवं आतिथ्य मेला
घटनाएँ14 घंटे पहले

काशी में स्वाद का उत्सव: इस जुलाई वाराणसी में यूपी फूड एक्सपो, राष्ट्रीय खाद्य एवं आतिथ्य मेला

काशी के खाने के शौकीनों, घरेलू रसोइयों और छोटे खाद्य-कारोबारियों के लिए एक ख़ास तारीख़: उत्तर प्रदेश फूड एक्सपो 25 और 26 जुलाई को वाराणसी के ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में आ रहा है, जिसे एक राष्ट्रीय खाद्य एवं आतिथ्य मेले के रूप में पेश किया जा रहा है। दो दिन का यह आयोजन पूरे खाद्य तंत्र को एक मंच पर लाने के लिए बनाया गया है — निर्माता और पैकेज्ड फूड ब्रांड, वितरक और आपूर्तिकर्ता, होटल-रेस्तरां (HoReCa) पेशेवर, शेफ और उपकरण बनाने वाले। आयोजकों के अनुसार यह नए उत्पादों की लॉन्चिंग, नेटवर्किंग और नई साझेदारियों का अवसर है, जो उत्तर प्रदेश को खाद्य-प्रसंस्करण और आतिथ्य केंद्र बनाने की दिशा से जुड़ा है। वाराणसी के लिए यह सुर्खी स्वाभाविक लगती है। शहर पहले से ही अपने स्ट्रीट फूड और व्यस्त कैटरिंग कारोबार के लिए मशहूर है, और ऐसा आयोजन स्थानीय विक्रेताओं, कैटरर्स और युवा उद्यमियों को खरीदारों से मिलने, नई रसोई तकनीक देखने और नए विचार पाने का मौका देता है। बनारसी बुनाई और शिल्प के लिए मशहूर ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर इसके लिए सुलभ और उपयुक्त स्थान है। अगर आप टिफ़िन सेवा, क्लाउड किचन या मिठाई की दुकान चलाते हैं, या बस खाने की नई चीज़ों में रुचि रखते हैं, तो यह एक सहज और उपयोगी सैर है। जाने से पहले प्रवेश और समय की ताज़ा जानकारी आयोजकों की सूची में ज़रूर देख लें।

TradeIndia — Varanasi trade fairsअपडेट खोलें
काशी में सावन की रौनक: महीने भर के श्रावण मेले के लिए सजते वाराणसी के मंदिर परिसर और गलियाँ
घटनाएँ1 दिन पहले

काशी में सावन की रौनक: महीने भर के श्रावण मेले के लिए सजते वाराणसी के मंदिर परिसर और गलियाँ

काशी पर मानसून के छाते ही शहर अपनी सबसे प्रिय मौसमी परंपराओं में से एक — सावन मेला — की तैयारी में जुट गया है। यह मेला श्रावण के पवित्र महीने में वाराणसी की रौनक बढ़ा देता है। स्थानीय सूचियों के अनुसार इस बार यह मेला जुलाई के अंत से अगस्त तक श्रावण के हफ़्तों में लगेगा, जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में शहर के शिव मंदिरों में उमड़ते हैं। परंपरागत रूप से यह मेला शहर की जानी-पहचानी जगहों पर सजता है — ऐतिहासिक दुर्गाकुंड मंदिर परिसर से लेकर सारनाथ के पास खुले मैदानों तक। शाम ढलते ही ये स्थान रंग और संगीत से भर उठते हैं — ढोलक की थाप, भोलेनाथ की महिमा में भजन, और फूलों, खिलौनों तथा पूजा-सामग्री की दुकानों के बीच समोसे, पानीपुरी और ताज़ी मिठाइयों की महक। परिवारों के लिए यह एक सहज, आनंददायक सैर है; और आगंतुकों के लिए काशी की भक्ति-धारा को उसके सबसे उत्सवमय मौसम में महसूस करने का अवसर। प्रवेश निःशुल्क है, जिससे मेला सबके लिए खुला रहता है। 'हर हर महादेव' के जयघोष के बीच सावन मेला एक बार फिर वाराणसी के मानसून को आस्था, स्वाद और अपनेपन के उत्सव में बदलने को तैयार है।

काशी में गोल्फ की शुरुआत: बीएलडब्ल्यू ग्रीन्स में पहली बार डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई नेक्सजेन टूर
खेल1 दिन पहले

काशी में गोल्फ की शुरुआत: बीएलडब्ल्यू ग्रीन्स में पहली बार डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई नेक्सजेन टूर

इस गर्मी में वाराणसी ने अपनी खेल-पहचान में एक नया अध्याय जोड़ा, जब शहर ने भारतीय पेशेवर गोल्फ़ के विकास सर्किट 'डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई नेक्सजेन टूर' का अपना चरण आयोजित किया। यह प्रतियोगिता बीएलडब्ल्यू ग्रीन्स गोल्फ़ कोर्स में खेली गई और काशी में पहली बार इस स्तर की गोल्फ़ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। कोलकाता के सुनीत चौरसिया ने 19 जून को चार शॉट के बड़े अंतर से ख़िताब अपने नाम किया और तीन राउंड में छह-अंडर 204 के स्कोर पर पारी समेटी। यह जीत उनके लिए ऐतिहासिक रही — इससे उन्होंने लगातार तीन नेक्सजेन ख़िताबों की हैट्रिक पूरी की, जो टूर के इतिहास में पहली बार हुआ, और एक ही सीज़न में तीन जीत के 2010 से चले आ रहे रिकॉर्ड की बराबरी की। इस प्रदर्शन से उन्हें सीज़न का 'ऑर्डर ऑफ़ मेरिट' ख़िताब और 2027 के मुख्य टूर में जगह भी मिली। ट्रॉफ़ी से बड़ी बात यह है कि वाराणसी अब राष्ट्रीय गोल्फ़ मानचित्र पर आ गया है। किसी पेशेवर प्रतियोगिता की मेज़बानी से शहर के खिलाड़ियों और युवाओं को शीर्ष खिलाड़ियों को क़रीब से देखने का दुर्लभ अवसर मिलता है, और बीएलडब्ल्यू ग्रीन्स जैसी स्थानीय सुविधाएँ चर्चा में आती हैं। तीर्थ और विरासत से आगे अपनी पहचान गढ़ती काशी के लिए यह खेल में एक और बढ़ता क़दम है।

काशी से विदेश तक आसान सफर: एयर इंडिया की नई 'ईज़ी कनेक्ट' सेवा वाराणसी को दिल्ली और दुनिया से जोड़ती है
यात्रा1 दिन पहले

काशी से विदेश तक आसान सफर: एयर इंडिया की नई 'ईज़ी कनेक्ट' सेवा वाराणसी को दिल्ली और दुनिया से जोड़ती है

वाराणसी से उड़ान भरने वाले यात्रियों के लिए अब विदेश तक का सफर पहले से कहीं आसान हो गया है। एयर इंडिया ने लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 'ईज़ी कनेक्ट' नाम की एक नई सेवा शुरू की है, जो दिल्ली के रास्ते होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्रा को काशी के यात्रियों के लिए काफ़ी सहज बना देती है। 25 जून से शुरू हुई इस सेवा के तहत एक दैनिक उड़ान (AI1111) यात्रियों को वाराणसी से दिल्ली ले जाती है, और इसका समय इस तरह रखा गया है कि उतरने के लगभग चार घंटे के भीतर वे एयर इंडिया की आगे की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पकड़ सकें। एयरलाइन के अनुसार इनमें लंदन हीथ्रो, फ्रैंकफर्ट, रोम, ज़्यूरिख, सिंगापुर, कुआलालंपुर और दुबई जैसे कुल 17 गंतव्य शामिल हैं। सबसे बड़ी सुविधा कागज़ी कार्यवाही में है। यात्री अपना चेक-इन और सामान वाराणसी में ही करा सकते हैं, सामान सीधे अंतिम गंतव्य तक भेजा जाता है, और दिल्ली में बैग दोबारा उठाने-जमा करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीर्थयात्रियों, विद्यार्थियों और परिवारों के लिए, जिन्हें पहले किसी महानगर तक जाना पड़ता था, यह घर से एक ही बुकिंग में सहज सफर जैसा है। एयर इंडिया के अनुसार वाराणसी इस बड़ी योजना के पहले शहरों में से है, और आगे और शहर जुड़ेंगे। दुनिया भर के यात्रियों को आकर्षित करने वाली काशी के लिए यह एक स्वागत-योग्य क़दम है, जो शहर को हर जगह से थोड़ा और क़रीब ले आता है।

गंगा पर तैरता पंचसितारा अनुभव: नया 'गंगोत्री क्रूज़' दिखाएगा काशी का शांत रूप
यात्रा2 दिन पहले

गंगा पर तैरता पंचसितारा अनुभव: नया 'गंगोत्री क्रूज़' दिखाएगा काशी का शांत रूप

वाराणसी के नदी पर्यटन में एक ख़ूबसूरत नया अनुभव जुड़ रहा है। अलकनंदा क्रूज़ लाइन द्वारा संचालित और रविदास घाट पर लंगर डाले 'गंगोत्री क्रूज़' एक चार-मंज़िला लक्ज़री जहाज़ है, जो यात्रियों को गंगा को इत्मीनान और सुकून भरी गति से निहारने का मौका देता है। दिन की यात्राओं में 200 तक और रात्रि-प्रवास में 24 कमरों में 48 मेहमानों की क्षमता के साथ यह पानी पर तैरते पंचसितारा होटल जैसा है। जहाज़ पर ज़ोर बनारस पर ही रहता है: स्थानीय व्यंजनों वाला फ़ाइन-डाइनिंग रेस्तराँ, साथ ही योग सत्र, भक्ति संगीत और विरासत पर चर्चाएँ, जो इस सफ़र को महज़ सैर नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव बना देती हैं। यहाँ सन डेक, स्पा और जिम भी है — और तीर्थ नगरी की भावना का सम्मान करते हुए जहाज़ पर शराब नहीं परोसी जाती। शहर के घाटों से आगे, लंबी यात्राएँ नदी के साथ मिर्ज़ापुर, ऐतिहासिक चुनार क़िला, विंध्याचल होते हुए प्रयागराज तक जाती हैं और क्षेत्र के कुछ सबसे प्रसिद्ध पड़ावों को जोड़ती हैं। पैकेज तीन दिन की छोटी यात्राओं से लेकर सप्ताह भर की यात्राओं तक हैं। जो लोग काशी और उसके आसपास को पानी की शांति से निहारना चाहते हैं, उनके लिए यह घूमने का एक आशाजनक नया तरीका है — पारंपरिक सूर्योदय नौका-सैर का एक धीमा, अधिक भावपूर्ण पूरक।

काशी की 'ग्रीन आर्मी': मंदिर के वस्त्रों से रोज़गार और स्वच्छ गंगा
समाचार2 दिन पहले

काशी की 'ग्रीन आर्मी': मंदिर के वस्त्रों से रोज़गार और स्वच्छ गंगा

वाराणसी की एक शांत लेकिन प्रेरक पहल यह दिखा रही है कि गंगा की देखभाल और रोज़गार सृजन साथ-साथ चल सकते हैं। मंदिरों और तीर्थयात्रा में चढ़ाए गए पुराने वस्त्र — जो कभी नदी में बहकर पहुँच जाते थे — अब इकट्ठा करके 'ग्रीन आर्मी' नामक समूह को सौंपे जा रहे हैं, जिसमें लगभग 250 ग्रामीण महिलाएँ इस कपड़े को मज़बूत, पर्यावरण-अनुकूल थैलों में बदल देती हैं। युवाओं द्वारा संचालित होप वेलफेयर फाउंडेशन के नेतृत्व में इस पहल ने अब तक एक लाख से अधिक मुफ़्त अपसाइकिल थैले स्थानीय बाज़ारों तक पहुँचाए हैं, जिससे ग्राहकों को प्लास्टिक-मुक्त विकल्प और महिलाओं को स्थिर आय व सम्मान दोनों मिलते हैं। इस प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर समूह अब थैलों से आगे बढ़कर मोटे कंबल और गर्म शॉल भी सिल रहा है, जो सर्दियों में बेघर लोगों को दिए जाएँगे। यह ऐसी चक्रीय, समुदाय-आधारित सोच है जो काशी पर बख़ूबी फबती है: कुछ भी पवित्र बर्बाद नहीं होता, नदी साफ़ रहती है और ग्रामीण महिलाओं को घर के पास ही हुनर और कमाई मिलती है। स्थानीय लोगों और आगंतुकों के लिए ऐसा एक अपसाइकिल बनारसी थैला ख़रीदना गंगा और शहर की परंपराओं को थामे हाथों — दोनों का साथ देने का एक छोटा, सुखद तरीका है।

काशी रुद्रास ने युवा क्रिकेटरों के लिए शुरू किया नया 'रुद्रास कप'
खेल2 दिन पहले

काशी रुद्रास ने युवा क्रिकेटरों के लिए शुरू किया नया 'रुद्रास कप'

वाराणसी की अपनी यूपीटी20 टीम काशी रुद्रास इस बार क्षेत्र की अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों पर ध्यान दे रही है, और प्रतिक्रिया ज़बरदस्त रही है। यूपीटी20 सीज़न 4 से पहले दो बार की चैंपियन टीम ने वाराणसी के डॉ. संपूर्णानंद (सिगरा) स्टेडियम में खिलाड़ियों के ट्रायल आयोजित किए, जहाँ पूरे उत्तर प्रदेश से 1,100 से अधिक उभरते क्रिकेटरों ने चयनकर्ताओं के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पंजीकरण कराया। खोज को और व्यापक बनाने के लिए टीम ने 'रुद्रास कप' शुरू किया है, जिसे किसी यूपीटी20 फ्रेंचाइज़ी द्वारा शुरू किया गया पहला क्षेत्रीय स्काउटिंग टूर्नामेंट बताया गया है। इसके पहले संस्करण में वाराणसी, प्रयागराज, झाँसी और फतेहपुर का प्रतिनिधित्व करने वाली चार क्षेत्रीय टीमें शामिल हुईं, जिससे छोटे केंद्रों के होनहार खिलाड़ियों को पहचान पाने का असली मंच मिला। काशी और आसपास के युवा क्रिकेटरों के लिए यह एक दुर्लभ और स्वागतयोग्य अवसर है — स्थानीय मैदानों से पेशेवर टी20 टीम तक पहुँचने का एक व्यवस्थित, प्रतिभा-आधारित रास्ता। दो बार खिताब जीत चुकी रुद्रास टीम में चयन सचमुच मायने रखता है। ऐसी ज़मीनी पहलें वाराणसी की खेल ऊर्जा को जीवंत बनाए रखती हैं और शहर के क्रिकेट-प्रेमी युवाओं को एक ठोस लक्ष्य देती हैं। प्रशंसक काशी रुद्रास के आधिकारिक चैनलों पर देख सकते हैं कि नए सीज़न के लिए कौन-से नए चेहरे चुने जाते हैं।

आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के नौ शिक्षक 2026 की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों की सूची में
शिक्षा3 दिन पहले

आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के नौ शिक्षक 2026 की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों की सूची में

विद्या के केंद्र के रूप में वाराणसी की पुरानी पहचान में एक और उपलब्धि जुड़ गई है: आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के नौ शिक्षकों को Research.com की 'वर्ल्ड्स बेस्ट साइंटिस्ट्स रैंकिंग्स 2026' में जगह मिली है—यह वैश्विक सूची शोधकर्ताओं को उनके लगातार अकादमिक प्रभाव के लिए सम्मानित करती है। सम्मानित शिक्षक कई अलग-अलग क्षेत्रों से हैं। इनमें मैकेनिकल एवं एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में प्रो. जहर सरकार; इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रो. सत्यव्रत जित और डॉ. सोमक भट्टाचार्य; मटीरियल्स साइंस में प्रो. राजीव प्रकाश, प्रो. प्रलय मैती और डॉ. अनुज कुमार; पर्यावरण विज्ञान में प्रो. राम शरण सिंह; इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी में डॉ. प्रांजल चंद्रा; और रसायन विज्ञान में प्रो. योगेश चंद्र शर्मा शामिल हैं। संस्थान के अनुसार यह रैंकिंग एच-इंडेक्स और विषय-विशेष डी-इंडेक्स जैसे वैश्विक रूप से मान्य शोध मानकों पर आधारित है। गंगा तट पर बसे इस ऐतिहासिक संस्थान के लिए यह सम्मान इस बात का गर्वपूर्ण प्रमाण है कि शहर से अपनी आध्यात्मिक विरासत के साथ-साथ अत्याधुनिक विज्ञान भी बह रहा है। यह क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी एक उत्साहजनक संदेश है कि विश्वस्तरीय शोध करियर यहीं काशी में गढ़े जा रहे हैं।

IIT (BHU) Varanasi — Public Relationsअपडेट खोलें
असली बनारसी सिल्क कैसे पहचानें: जी.आई. टैग और काशी के बुनकरों की विरासत
खरीदारी3 दिन पहले

असली बनारसी सिल्क कैसे पहचानें: जी.आई. टैग और काशी के बुनकरों की विरासत

काशी की याद को घर तक ले जाने के लिए हाथ से बुनी बनारसी साड़ी जैसा तोहफ़ा शायद ही कोई हो—और थोड़ी समझ खरीदार और करघे के पीछे बैठे बुनकर, दोनों के काम आती है। साल 2009 से 'बनारस ब्रोकेड्स एंड साड़ीज़' को भौगोलिक संकेत (जी.आई.) टैग मिला हुआ है, जो बनारसी नाम को कानूनी रूप से केवल वाराणसी और उसके आस-पास के कुछ ज़िलों—मिर्ज़ापुर, चंदौली, भदोही, जौनपुर और आज़मगढ़—में बुने रेशम के लिए सुरक्षित रखता है। यह जी.आई. रेशमी ब्रोकेड, साड़ी, ड्रेस मटीरियल और कढ़ाई को शामिल करता है, और इसका मकसद उस शिल्प की रक्षा करना है जो पूरे क्षेत्र में बुनकर परिवारों के एक बड़े समुदाय को रोज़गार देता है। परंपरागत रूप से यह काम घर पर पैर से चलने वाले करघों पर होता है, और हुनर पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपा जाता है; डिज़ाइन की बारीकी के अनुसार एक साड़ी को बनने में कुछ हफ़्तों से लेकर कई महीने तक लग सकते हैं। शहर में खरीदारी करने वालों के लिए व्यावहारिक बात यह है कि जी.आई. चिह्न देखें और मशीन से बनी नकल के बजाय मान्यता प्राप्त बुनकरों, सहकारी समितियों या भरोसेमंद शोरूम से खरीदें। असली हथकरघा चुनना काशी की बुनाई गलियों में पैसा बनाए रखता है और सदियों पुराने शिल्प को जीवित रखता है। एक असली बनारसी सिर्फ़ एक सुंदर खरीद नहीं—यह उन कारीगरों का साथ देने का सीधा तरीका है जो इस शहर को चमक देते हैं।

Wikipedia — Banarasi sariअपडेट खोलें
बनारसगिरी: वाराणसी की गलियों को कला, खान-पान और संगीत के उत्सव में बदलता जन-आंदोलन
मनोरंजन3 दिन पहले

बनारसगिरी: वाराणसी की गलियों को कला, खान-पान और संगीत के उत्सव में बदलता जन-आंदोलन

पिछले कुछ समय से बनारसगिरी नाम का एक जन-संचालित स्ट्रीट फेस्टिवल वाराणसी के उत्सव मनाने के अंदाज़ को नया रूप दे रहा है। पहली बार 2025 में आयोजित इस उत्सव के अब तक कई संस्करण हो चुके हैं, जो सभागारों से निकलकर शहर के खुले सार्वजनिक स्थानों—फुटपाथ, पार्क और मोहल्लों के कोनों—को कुछ दिनों के लिए जीवंत सांस्कृतिक मंच बना देते हैं। विचार सरल है: शहर की जीवंत परंपराओं को खुले में लाना और सबको उसमें शामिल करना। हाल के संस्करणों में स्थानीय कारीगरों ने मिट्टी के बर्तन, हथकरघा बुनाई, कालीन और कांच के मनकों का काम दिखाया; बनारसी स्ट्रीट फूड—चाट, चाय, कुल्फी और लिट्टी-चोखा—के स्टॉल लगे; लोक संगीत गूँजा; और अखाड़ा कार्यशालाएँ तक हुईं। साथ ही बच्चों के रचनात्मक ज़ोन, ध्यान-कल्याण सत्र और नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच जैसी सेवाएँ भी चलीं। बनारसगिरी की सबसे खास बात यह है कि इसे शहरवासी खुद चलाते हैं। कारीगर, कलाकार, विक्रेता, स्वयंसेवी संस्थाएँ और स्वयंसेवक मिलकर इसे साकार करते हैं, जिससे कारीगरों को नए दर्शक और युवा बनारसियों को अपनी परंपराओं से सीधा जुड़ाव मिलता है। आगंतुकों के लिए यह घाटों से परे शहर को महसूस करने का आत्मीय अवसर है—काशी, खुलकर काशी का उत्सव मनाती हुई।

'आस्क नंदी': काशी विश्वनाथ के श्रद्धालुओं की मदद के लिए चौबीस घंटे डिजिटल सहायक
समाचार4 दिन पहले

'आस्क नंदी': काशी विश्वनाथ के श्रद्धालुओं की मदद के लिए चौबीस घंटे डिजिटल सहायक

काशी विश्वनाथ में दर्शन की योजना बनाना अब और आसान हो रहा है, और इसका श्रेय एक नए डिजिटल सहायक को जाता है। मंदिर के आधिकारिक माध्यमों पर अब 'आस्क नंदी' नाम का एआई-आधारित सहायक उपलब्ध है, जो चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं के सवालों का जवाब देता है—दर्शन के सबसे अच्छे समय से लेकर ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया तक। विचार सरल पर सचमुच उपयोगी है। कई पन्ने खंगालने या लंबी कतार में पूछने के बजाय, आगंतुक कोई भी सवाल टाइप करके दिन या रात किसी भी समय सरल भाषा में मार्गदर्शन पा सकता है। मंदिर पर नज़र रखने वाली तीर्थ-गाइड बताती हैं कि यह सहायक भीड़ की जानकारी और दर्शन-स्लॉट से जुड़े सवालों में मदद कर सकता है, जो व्यस्त सावन और उसके चार सोमवारों के नज़दीक आते ही ख़ास तौर पर काम आता है। पहली बार आने वाले और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए यह हर समय उपलब्ध मदद यात्रा की बहुत सी उलझनें दूर कर देती है—कब कतार कम रहती है, धाम में क्या अपेक्षित है, और दिन की योजना कैसे बनाएँ। यह मंदिर के अन्य आगंतुक-हितैषी कदमों, जैसे छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र और बहुभाषी सहायता केंद्रों के साथ मिलकर एक सहज, बेहतर व्यवस्थित अनुभव की ओर इशारा करता है। हमेशा की तरह, श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि अंतिम जानकारी के लिए मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और ज़मीनी स्वयंसेवकों पर भरोसा करें, और इस डिजिटल सहायक को अपनी काशी यात्रा की योजना के लिए एक सुविधाजनक पहला पड़ाव मानें।

TripCosmos — Shravan Special Kashi Vishwanath Guide 2026अपडेट खोलें
सावन के लिए तैयार काशी विश्वनाथ धाम: छायादार शेड और जल-सेवा की व्यवस्था
घटनाएँ4 दिन पहले

सावन के लिए तैयार काशी विश्वनाथ धाम: छायादार शेड और जल-सेवा की व्यवस्था

जैसे-जैसे पवित्र सावन महीना नज़दीक आ रहा है—जुलाई 2026 के उत्तरार्ध में शुरू होकर अपने चार विशेष सोमवार (सावन सोमवार) अगस्त तक ले जाते हुए—काशी विश्वनाथ धाम शिव भक्तों की विशाल भीड़ के स्वागत के लिए कई श्रद्धालु-हितैषी व्यवस्थाओं के साथ तैयार हो रहा है। लंबी दर्शन कतारों को धूप और बारिश में आरामदायक बनाए रखने के लिए परिसर में बड़े छायादार शेड और अतिरिक्त टेंट लगाए जा रहे हैं। मार्ग पर नियमित स्थानों पर पेयजल, ग्लूकोज़-जल और ओआरएस बाँटने की योजना है ताकि प्रतीक्षा के दौरान भक्त हाइड्रेटेड रहें। धाम के भीतर कई चिकित्सा दल तैनात रहेंगे, और बिछड़ने वालों की मदद के लिए बहुभाषी 'खोया-पाया' केंद्र की व्यवस्था की जा रही है। व्यस्त दिनों में कतार को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने के लिए ज़िग-ज़ैग बैरिकेडिंग जैसे भीड़-प्रबंधन उपाय भी किए गए हैं। ये सभी कदम भारत के सबसे बड़े भक्ति-समागमों में से एक को देखभाल और गरिमा के साथ आयोजित करने में मंदिर प्रशासन के बढ़ते अनुभव को दर्शाते हैं। सावन में दर्शन की योजना बना रहे भक्तों के लिए सलाह सरल है: जल्दी पहुँचें, हल्का बारिश-बचाव साथ रखें और स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें। छाया, जल और चिकित्सा सहायता के साथ धाम इस मौसम हर श्रद्धालु के दर्शन को सहज बनाने का प्रयास कर रहा है।

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काशी पर मानसून की हरियाली: वाराणसी में शांत घाट और सुहानी सुबहें
मौसम4 दिन पहले

काशी पर मानसून की हरियाली: वाराणसी में शांत घाट और सुहानी सुबहें

काशी पर मानसून छा गया है और अपने साथ शहर का सबसे भावपूर्ण मौसम लेकर आया है। जुलाई से सितंबर तक हल्की बारिश घाटों को धोती है, गलियों के नीम और पीपल गहरे हरे हो जाते हैं, और लंबी गर्मी के बाद गंगा के ऊपर की हवा ताज़ा लगती है। 2026 के मौसम पर नज़र रखने वाली यात्रा-गाइड बताती हैं कि दिन का तापमान अब तीस के आसपास आ गया है, और गर्म-उमस भरी दोपहरें ठंडी बौछारों से राहत पाती हैं। आगंतुकों और स्थानीय लोगों—दोनों के लिए मानसून की काशी का एक शांत आकर्षण है। कम भीड़ के कारण घाट अधिकतर स्थानीय भक्तों, सुबह टहलने वालों और फ़ोटोग्राफ़रों के होते हैं, और मंदिरों में सुकून रहता है। इस मौसम में ठहरना अक्सर आसान होता है, और बारिश से धुले शिखरों-छतों का दृश्य कैमरा-प्रेमियों को बहुत भाता है। कुछ छोटी सावधानियाँ इसे सुरक्षित बनाती हैं। भारी बारिश के बाद जब गंगा तेज़ बहती है, तो सुरक्षा के लिए नौका सेवाएँ कभी-कभी रोक दी जाती हैं—हमेशा नाविकों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। हल्की छतरी रखें, गीली सीढ़ियों के लिए पकड़ वाले जूते पहनें और आने-जाने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय रखें। समझदारी से अपनाया जाए तो मानसून काशी को उसके सबसे हरे, शांत और सच्चे स्थानीय रूप में दिखाता है।

Kashitaxi — Varanasi in Monsoon 2026अपडेट खोलें
सारनाथ में गुरु पूर्णिमा की तैयारी: जहाँ बुद्ध ने दिया था अपना पहला उपदेश
घटनाएँ5 दिन पहले

सारनाथ में गुरु पूर्णिमा की तैयारी: जहाँ बुद्ध ने दिया था अपना पहला उपदेश

जैसे-जैसे काशी पर मानसून धीरे-धीरे छाने लगा है, सारनाथ गुरु पूर्णिमा मनाने की तैयारी में है — जो इस क्षेत्र के आध्यात्मिक पंचांग का एक बेहद महत्वपूर्ण दिन है। इस वर्ष 29 जुलाई को पड़ने वाले इस दिन का यहाँ खास महत्व है: माना जाता है कि सारनाथ ही वह स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया और "धर्मचक्र" को गति देते हुए अपने पहले शिष्यों के साथ मार्ग साझा किया। धमेक स्तूप और प्राचीन विहारों के आसपास इस अवसर पर आमतौर पर श्रद्धालु, भिक्षु और जिज्ञासु यात्री शांत प्रार्थना, जप और ध्यान के लिए जुटते हैं। गुरु पूर्णिमा वह दिन भी है जब कई परंपराओं के लोग अपने गुरुओं और मार्गदर्शकों का सम्मान करते हैं — एक कोमल, चिंतनशील भाव जो सारनाथ के शांत उपवनों से बखूबी मेल खाता है। वाराणसी के परिवारों के लिए यह सारनाथ की छोटी-सी यात्रा का सुंदर बहाना है — स्तूपों और संग्रहालय के बीच एक इत्मीनान भरी सुबह बिताएँ और बारिश के बाद की उस शांति में डूब जाएँ जो सदियों से साधकों को यहाँ खींचती रही है। चाहे आप श्रद्धा अर्पित करने आएँ, थोड़ा इतिहास जानने या बस हरियाली का आनंद लेने — यह दिन मनाने का एक गर्मजोशी भरा तरीका है। हमेशा की तरह, निकलने से पहले स्थानीय समय अवश्य देख लें।

वाराणसी को मिलेगी भारत की पहली नेट-ज़ीरो लाइब्रेरी: गंगा से प्रेरित डिज़ाइन और हरित तकनीक
शिक्षा5 दिन पहले

वाराणसी को मिलेगी भारत की पहली नेट-ज़ीरो लाइब्रेरी: गंगा से प्रेरित डिज़ाइन और हरित तकनीक

वाराणसी में पढ़ने वालों के लिए एक अनोखी सौगात जुड़ने जा रही है: भारत की पहली नेट-ज़ीरो लाइब्रेरी। इसे वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) एनएचपीसी लिमिटेड के सहयोग से करीब ₹20 करोड़ की लागत से बना रहा है। एलटी कॉलेज परिसर में बनने वाली यह इमारत साल भर में उतनी ही स्वच्छ ऊर्जा पैदा करने के लिए डिज़ाइन की गई है जितनी वह इस्तेमाल करेगी। करीब 20,930 वर्ग फुट में फैली इस लाइब्रेरी में लगभग 500 पाठकों के बैठने की जगह होगी और 35,000 से अधिक किताबें रखी जाएँगी। पढ़ने के हॉल के अलावा योजना में एक डिजिटल लाइब्रेरी, बच्चों के लिए अलग हिस्सा, एक ऑडिटोरियम और एक सांस्कृतिक गैलरी शामिल है — जिससे यह अध्ययन के साथ-साथ एक सामुदायिक स्थान भी बन जाएगी। सोलर पैनल, वर्षा जल संचयन, ऊर्जा-कुशल रोशनी और शीतलन, स्मार्ट जल प्रबंधन और एक हरित छत इस टिकाऊ डिज़ाइन का हिस्सा हैं। काशी के अनुरूप ही इसकी वास्तुकला गंगा की लहरों और पारंपरिक मंदिर शैली से प्रेरित है, ताकि भविष्य की ओर देखते हुए भी यह इमारत शहर से जुड़ी महसूस हो। परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और हर उम्र के जिज्ञासु पाठकों के लिए यह सीखने की एक शांत, आधुनिक जगह का वादा करती है — और यह भी दिखाती है कि बनारस जलवायु के प्रति सजग डिज़ाइन को कैसे अपना रहा है। निर्माण जल्द आगे बढ़ने की उम्मीद है।

काशी बुलेट ट्रेन के करीब: दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर डिज़ाइन का काम शुरू
यात्रा5 दिन पहले

काशी बुलेट ट्रेन के करीब: दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर डिज़ाइन का काम शुरू

काशी और राजधानी के बीच सफर करने वालों के लिए अच्छी खबर है: प्रस्तावित दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर ने एक ठोस कदम आगे बढ़ाया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRCL) ने इस मार्ग की सिविल संरचनाओं के डिज़ाइन के लिए बोलियाँ आमंत्रित की हैं — यह केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित सात बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में से एक है। बनने के बाद यह कॉरिडोर दिल्ली–वाराणसी की यात्रा को घटाकर करीब तीन घंटे पचास मिनट कर देगा और रास्ते में हमारे शहर को नोएडा, आगरा और प्रयागराज से जोड़ेगा। इस लाइन को आगे पटना और सिलीगुड़ी की ओर बढ़ाने की भी योजना है, जिससे वाराणसी उत्तर और पूर्वी भारत के एक बड़े हाई-स्पीड नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा। काशी आने वाले निवासियों, विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए तेज़ और आरामदायक सफर का मतलब होगा आसान यात्राएँ, मज़बूत कारोबारी संपर्क और स्थानीय पर्यटन व आतिथ्य को नई गति। परियोजना अभी योजना और डिज़ाइन के चरण में है, इसलिए यात्रा की कोई तारीख तय नहीं है — पर नई डिज़ाइन बोलियाँ बताती हैं कि यह विचार कागज़ से ज़मीन की ओर बढ़ रहा है। यह इस बात की सुखद झलक है कि बनारस अपनी शाश्वत आत्मा को सहेजते हुए भविष्य की ओर कैसे बढ़ता जा रहा है।

अंतर-विद्यालय जिला शतरंज चैम्पियनशिप में चमके काशी के युवा शतरंज खिलाड़ी
खेल6 दिन पहले

अंतर-विद्यालय जिला शतरंज चैम्पियनशिप में चमके काशी के युवा शतरंज खिलाड़ी

इस वर्ष की अंतर-विद्यालय जिला शतरंज चैम्पियनशिप में वाराणसी की बढ़ती शतरंज प्रतिभा खुलकर सामने आई, जहाँ शहर के युवा खिलाड़ियों ने कई आयु-वर्गों में प्रभावित किया। सनबीम स्कूल, लहरतारा के विद्यार्थियों ने बोर्ड पर शानदार प्रदर्शन कर टूर्नामेंट के ओवरऑल चैम्पियन का खिताब अपने नाम किया। इस चैम्पियनशिप में जिले भर के स्कूलों की टीमें जुटीं और कई कड़े मुकाबले हुए, जिन्होंने खिलाड़ियों के धैर्य, गणना और संयम की परीक्षा ली। छोटी कक्षाओं के बच्चों समेत सभी प्रतिभागियों के लिए यह अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करने, बेहतर प्रतिद्वंद्वियों से सीखने और महीनों के अभ्यास से जीते पदक घर ले जाने का अवसर था। वाराणसी के स्कूलों में शतरंज लगातार फल-फूल रहा है — नियमित कोचिंग, अंतर-सदन प्रतियोगिताओं और जिला स्तर के आयोजनों ने बच्चों को घर के पास ही एक प्रतिस्पर्धी मंच दिया है। ऐसी जीतें और परिवारों को प्रेरित करती हैं कि वे अपने बच्चों को इस खेल से जोड़ें, जो एकाग्रता और समस्या-समाधान जैसे गुण विकसित करता है। सभी युवा विजेताओं और उनके प्रशिक्षकों को बधाई। ऐसी उपलब्धियाँ ही किसी शहर की अगली पीढ़ी के खिलाड़ी तैयार करती हैं — और काशी के लिए अपने विद्यार्थियों पर गर्व करने का एक और कारण हैं।

Sunbeam Lahartara, Varanasi — school announcementअपडेट खोलें
आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में 2026–27 से चिप डिज़ाइन और मेडिकल डिवाइस के नए पाठ्यक्रम
शिक्षा6 दिन पहले

आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में 2026–27 से चिप डिज़ाइन और मेडिकल डिवाइस के नए पाठ्यक्रम

आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी सत्र 2026–27 के लिए अपने पाठ्यक्रमों का विस्तार कर रहा है और इंजीनियरिंग के कुछ सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों से जुड़ी नई एम.टेक विशेषज्ञताएँ शुरू कर रहा है। संस्थान वीएलएसआई आर्किटेक्चर एवं चिप डिज़ाइन, मेडिकल डिवाइसेज़, तथा टनलिंग एवं अंडरग्राउंड स्पेस इंजीनियरिंग में नई धाराएँ शुरू कर रहा है, साथ ही डिसीज़न साइंस एंड इंजीनियरिंग में एक नया पीएच.डी. कार्यक्रम भी। ये नए पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भविष्य के लिए तैयार, अंतर-विषयक शिक्षा की दिशा में संस्थान के प्रयास को दर्शाते हैं। चिप डिज़ाइन और सेमीकंडक्टर भारत की बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक्स महत्वाकांक्षाओं के केंद्र में हैं, जबकि मेडिकल डिवाइसेज़ धारा हेल्थकेयर तकनीक में नए अवसर खोलती है — दोनों ही क्षेत्रों में प्रशिक्षित प्रतिभा की भारी माँग है। इन कार्यक्रमों की घोषणा तब हुई जब आईआईटी (बीएचयू) ने 29 जून 2026 को अपना पहला 'उत्थान' संस्थान दिवस मनाया, जिसमें शैक्षणिक और पूर्व-छात्र उपलब्धियों का उत्सव भी मनाया गया। जुलाई 2026 सत्र के लिए एम.टेक, एम.फार्म और पीएच.डी. में प्रवेश सामान्य गेट आधारित प्रक्रिया से हो रहे हैं। वाराणसी और आसपास के छात्रों के लिए इसका अर्थ है — घर के पास ही विश्वस्तरीय विकल्पों का बढ़ना, और यह भी संकेत कि काशी उच्च शिक्षा और अत्याधुनिक शोध के केंद्र के रूप में अपनी पहचान लगातार मज़बूत कर रही है।

IIT (BHU) Varanasi — officialअपडेट खोलें
काशी विश्वनाथ बना दुनिया का सबसे अधिक दर्शन वाला मंदिर, वाराणसी में रिकॉर्ड श्रद्धालु
समाचार6 दिन पहले

काशी विश्वनाथ बना दुनिया का सबसे अधिक दर्शन वाला मंदिर, वाराणसी में रिकॉर्ड श्रद्धालु

वाराणसी ने एक उल्लेखनीय पड़ाव पार किया है — श्री काशी विश्वनाथ धाम अब दुनिया का सबसे अधिक दर्शन वाला मंदिर बन गया है, जहाँ 2026 में अनुमानतः 14.6 करोड़ श्रद्धालु पहुँचे, जबकि पूरे शहर में साल भर में लगभग 14.7 करोड़ आगंतुक आए। एक दशक पहले काशी में सालाना करीब 50 लाख लोग ही आते थे — आज की भीड़ बताती है कि शहर का आध्यात्मिक पर्यटन कितना बढ़ा है। इस बदलाव के पीछे बड़ी भूमिका काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की है, जिसने मंदिर परिसर को चौड़े रास्ते, गंगा तट तक पहुँच और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ दीं। रेल और हवाई संपर्क में सुधार, साफ़-सुथरे घाट और बेहतर नागरिक सुविधाओं ने देश-विदेश से आने वाले परिवारों के लिए घाटों और धाम तक पहुँचना आसान बना दिया है। बनारस के लिए ये आँकड़े केवल सुर्खी नहीं हैं। हर आगंतुक शहर के नाविकों, गाइडों, बुनकरों, फूल विक्रेताओं, भोजनालयों और छोटी दुकानों का सहारा बनता है, जिससे तीर्थ अर्थव्यवस्था का लाभ अनगिनत स्थानीय रोज़गारों तक पहुँचता है। होमस्टे और होटलों में साल भर स्थिर माँग रहती है, और घाटों के आसपास के मोहल्लों में नया निवेश हो रहा है। यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सुबह जल्दी और सप्ताह के दिन दर्शन और घाटों पर शांत सैर के लिए सबसे अच्छे रहते हैं। आप जैसे भी काशी आएँ, अब आप धरती के सबसे बड़े तीर्थ-समागमों में से एक का हिस्सा बनते हैं — जो भारत के आध्यात्मिक जीवन में इस शहर के शाश्वत स्थान का जीवंत प्रमाण है।

Business Standard — East UP temple economyअपडेट खोलें
'ईज़ी कनेक्ट' पर पहला शहर बना वाराणसी: अब आसान होगा अंतरराष्ट्रीय सफर
यात्रा7 दिन पहले

'ईज़ी कनेक्ट' पर पहला शहर बना वाराणसी: अब आसान होगा अंतरराष्ट्रीय सफर

वाराणसी ने वैश्विक विमानन के नक्शे पर एक नए अंदाज़ में कदम रखा है। जून 2026 के अंत में एयर इंडिया ने अपनी 'ईज़ी कनेक्ट' सेवा शुरू की और सबसे पहले जिस शहर से यह सेवा शुरू हुई, वह वाराणसी ही है। यह एक नए 'हब-एंड-स्पोक' ढांचे का हिस्सा है, जिसका मकसद छोटे शहरों से होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्रा को कहीं आसान बनाना है। इसके तहत लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से यात्री अपनी इमिग्रेशन और बैगेज की औपचारिकताएँ यहीं पूरी कर लेते हैं और फिर दिल्ली होते हुए आगे की उड़ान पकड़ते हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) इसे "एक शहर, सत्रह अंतरराष्ट्रीय गंतव्य, असीम संभावनाएँ" बता रहा है — यानी काशी से एक यात्री अब दिल्ली के रास्ते एक ही सहज सफ़र में लगभग 17 अंतरराष्ट्रीय स्थानों तक पहुँच सकता है, वह भी बीच में दोबारा बैग चेक कराने की झंझट के बिना। एयर इंडिया के अनुसार आने वाले महीनों में यह सेवा अमृतसर, चेन्नई, गोवा, गुवाहाटी और पटना जैसे शहरों तक बढ़ेगी, पर इसकी शुरुआत वाराणसी से ही हुई। घाटों और सारनाथ की ओर आने वाले तीर्थयात्रियों, विद्यार्थियों और विदेशी मेहमानों के इस शहर के लिए यह इसकी बढ़ती कनेक्टिविटी पर भरोसे की मुहर है। चाहे आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे काशीवासी हों या अपनों की घर-वापसी का इंतज़ार कर रहे हों — वादा एक ही है: कम हवाई अड्डे की भागदौड़ और अपने शहर से ही दुनिया तक का आसान रास्ता।

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