
देव दीपावली, देवताओं की दिवाली, कार्तिक पूर्णिमा पर — दिवाली के 15 दिन बाद मनाई जाती है। देवता गंगा में स्नान करने और दीपों से उत्सव मनाने उतरते हैं। यह वाराणसी की अनूठी परंपरा है जो अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गई है।
घाटों की सीढ़ियों पर दस लाख से अधिक दीये जलाएँ। पूर्णिमा के चंद्रमा के नीचे गंगा में पवित्र स्नान करें। भव्य गंगा आरती देखें। नदी में दीये प्रवाहित करें। नावों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम।
देव दीपावली वाराणसी का सबसे भव्य उत्सव है। 10 लाख से अधिक दीये सभी 84 घाटों को रोशन करते हैं। प्रधानमंत्री अक्सर उपस्थित होते हैं। लेज़र शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नौका विहार इसे अद्भुत बनाते हैं। गंगा पर नाव से दृश्य सर्वश्रेष्ठ होता है।