
होली बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है — राक्षसी होलिका का दहन और प्रह्लाद की भक्ति। अगले दिन, रंगवाली होली, राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम का रंगों का त्योहार है।
दिन 1 (होलिका दहन): सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन करें। परिक्रमा करें। दिन 2 (रंगवाली होली): रंगों और पानी से खेलें, गुझिया और ठंडाई खाएँ, लोक संगीत पर नाचें।
वाराणसी की होली प्रसिद्ध है। उत्सव काशी विश्वनाथ में रंग भरी एकादशी से एक सप्ताह पहले शुरू होता है। हर घाट पर होलिका दहन की आग जलाई जाती है। अगले दिन पूरा शहर रंगों में डूब जाता है, मणिकर्णिका और अस्सी घाट पर विशेष उत्सव होते हैं। भांग वाली ठंडाई विशेष पेय है।