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त्योहार गाइड

शारदीय नवरात्रि 2027

शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख नवरात्रि है, जो शरद ऋतु में आती है।

342 दिन शेष
तिथियाँ
30 सितंबर – 8 अक्टूबर 2027 · 9 दिन
मुख्य मुहूर्त
घटस्थापना मुहूर्त · गुरु, 30 सितंबर · 8:05 – 9:48 पूर्वाह्न

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • घटस्थापना अभिजित मुहूर्त48मि
  • ब्रह्म मुहूर्त48मि
  • अमृत काल1घं 29मि

इन समयों से बचें

  • यम गण्डम1घं 30मि
  • दुर्मुहूर्त48मि
  • राहु काल1घं 30मि
  • दुर्मुहूर्त48मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
5:49 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
5:46 अपराह्न
चंद्रोदय
5:52 पूर्वाह्न
चंद्रास्त
5:38 अपराह्न

दिन-ब-दिन

शारदीय नवरात्रि के 9 दिन

  1. दिन 1मुख्य मुहूर्त · 8:05 – 9:48 पूर्वाह्न

    घटस्थापना

    रंग पीलामाँ शैलपुत्री

    देवी दुर्गा का प्रथम स्वरूप। हिमालय की पुत्री, वे वृषभ नंदी पर सवार हैं और त्रिशूल व कमल धारण करती हैं।

    प्रसाद: शुद्ध देसी घी

    ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

    सूर्योदय
    5:49 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:46 अपराह्न
    अभिजित
    11:24 पूर्वाह्न – 12:11 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: गुरु, 30 सितंबर
  2. दिन 2

    द्वितीया

    रंग हरामाँ ब्रह्मचारिणी

    देवी का तपस्विनी स्वरूप जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।

    प्रसाद: चीनी

    ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

    सूर्योदय
    5:50 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:45 अपराह्न
    अभिजित
    11:23 पूर्वाह्न – 12:11 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शुक्र, 1 अक्टूबर
  3. दिन 3

    तृतीया

    रंग स्लेटीमाँ चंद्रघंटा

    योद्धा स्वरूप जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है। वे बाघ पर सवार हैं और दस भुजाओं वाली हैं।

    प्रसाद: दूध

    ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः

    सूर्योदय
    5:50 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:44 अपराह्न
    अभिजित
    11:23 पूर्वाह्न – 12:11 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शनि, 2 अक्टूबर
  4. दिन 4

    चतुर्थी

    रंग नारंगीमाँ कूष्मांडा

    अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली। उनका नाम 'ब्रह्मांडीय अंडा' है — उन्होंने अपनी हँसी से संसार बनाया।

    प्रसाद: मालपुआ

    ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः

    सूर्योदय
    5:50 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:43 अपराह्न
    अभिजित
    11:23 पूर्वाह्न – 12:10 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: रवि, 3 अक्टूबर
  5. दिन 5

    पंचमी

    रंग सफ़ेदमाँ स्कंदमाता

    भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता। वे कमल पर विराजमान हैं, गोद में पुत्र के साथ, मातृ प्रेम का प्रतीक।

    प्रसाद: केला

    ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

    सूर्योदय
    5:51 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:42 अपराह्न
    अभिजित
    11:23 पूर्वाह्न – 12:10 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: सोम, 4 अक्टूबर
  6. दिन 6

    षष्ठी

    रंग लालमाँ कात्यायनी

    ऋषि कात्यायन के यहाँ जन्मी, वे वह योद्धा स्वरूप हैं जिन्होंने महिषासुर का वध किया।

    प्रसाद: शहद

    ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

    सूर्योदय
    5:51 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:41 अपराह्न
    अभिजित
    11:22 पूर्वाह्न – 12:10 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: मंगल, 5 अक्टूबर
  7. दिन 7

    सप्तमी

    रंग रॉयल ब्लूमाँ कालरात्रि

    दुर्गा का सबसे उग्र स्वरूप — श्याम वर्ण, खुले केश। वे अज्ञान और अंधकार का नाश करती हैं।

    प्रसाद: गुड़

    ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

    सूर्योदय
    5:52 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:40 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: बुध, 6 अक्टूबर
  8. दिन 8

    अष्टमी

    रंग गुलाबीमाँ महागौरी

    अत्यंत गौर व तेजस्वी स्वरूप। कठोर तपस्या के बाद शिव ने उन्हें गंगाजल से शुद्ध किया, जिससे वे श्वेत वर्ण हो गईं।

    प्रसाद: नारियल

    ॐ देवी महागौर्यै नमः

    सूर्योदय
    5:52 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:39 अपराह्न
    अभिजित
    11:22 पूर्वाह्न – 12:09 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: गुरु, 7 अक्टूबर
  9. दिन 9

    नवमी

    रंग बैंगनीमाँ सिद्धिदात्री

    सभी सिद्धियों की दात्री। भगवान शिव ने भी उनकी कृपा से अपनी शक्तियाँ प्राप्त कीं।

    प्रसाद: तिल

    ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः

    सूर्योदय
    5:53 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:38 अपराह्न
    अभिजित
    11:22 पूर्वाह्न – 12:09 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शुक्र, 8 अक्टूबर

घटस्थापना का दिन

गुरु, 30 सितंबर का पंचांग

तिथि
अमावस्या, फिर प्रतिपदा
नक्षत्र
हस्त
योग
ब्रह्म
करण
नाग
पक्ष
कृष्ण
मास
आश्विन
तिथि
अमावस्याआरंभ समाप्त फिर प्रतिपदासमाप्त
नक्षत्र
हस्तआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • शुभउत्तम
  • रोगबचें
  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें
  • शुभउत्तम

रात

  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम

कहानी

शारदीय नवरात्रि: महत्व और अनुष्ठान

यह महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का सम्मान करती है और विजयादशमी (दशहरा) के साथ समाप्त होती है।

अनुष्ठान

पहले दिन सुबह के घटस्थापना मुहूर्त (प्रतिपदा रहते दिन का पहला तिहाई भाग) में, अन्यथा अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना करें। 9 दिन व्रत रखें। प्रतिदिन देवी के एक स्वरूप की पूजा करें। दुर्गा अष्टमी और महा नवमी में विशेष पूजा और हवन होते हैं। कन्या पूजा से समापन करें।

व्रत

9 दिन कठोर व्रत। केवल सात्विक भोजन — प्याज़, लहसुन, अनाज वर्जित। फल, दूध और सेंधा नमक की अनुमति है।

स्थानीय रंग

वाराणसी में शारदीय नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि में वाराणसी की दुर्गा पूजा भव्य होती है। पूरे शहर में पंडाल लगाए जाते हैं। बंगाली समुदाय दशाश्वमेध घाट क्षेत्र में जोशीले आयोजन करता है। रामनगर की रामलीला — विश्व की सबसे पुरानी — साथ-साथ चलती है।

आगे देखें

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