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केदार घाट

केदार घाट वाराणसी के पांच सबसे पवित्र घाटों में से एक है (पंच तीर्थ) और केदारेश्वर मंदिर का घर है — एक दक्षिण भारतीय शैली का मंदिर जो हिमालय में केदारनाथ तीर्थयात्रा की आध्यात्मिक शक्ति की नकल करता है। यह घाट विशेष रूप से दक्षिण भारतीय तीर्थयात्रियों के बीच लोकप्रिय है जो केदारेश्वर के रूप में शिव की पूजा करने आते हैं। मंदिर की द्रविड़ वास्तुकला आसपास की इमारतों की उत्तर भारतीय शैली से आकर्षक विरोधाभास प्रस्तुत करती है। घाट को खूबसूरती से बनाए रखा गया है, जिसमें दक्षिण भारतीय परंपरा में लाल और सफेद धारियों में रंगी रंगीन सीढ़ियां हैं।

आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व

परंपरा के अनुसार, यहां केदारेश्वर की पूजा करने से उत्तराखंड में केदारनाथ की कठिन तीर्थयात्रा के समान पुण्य प्राप्त होता है। इससे काशी उन वृद्ध और अस्वस्थ भक्तों के लिए सुलभ हो गई जो हिमालयी यात्रा नहीं कर सकते थे। केदार घाट पंच तीर्थ में से एक है — पांच आवश्यक स्नान घाट जो हर काशी तीर्थयात्री को अवश्य जाना चाहिए: अस्सी, दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, पंचगंगा, और आदि केशव (कुछ परंपराओं में केदार को प्रतिस्थापित किया जाता है)।

🪔 अंदरूनी सुझाव

✅ लाल-और-सफेद धारीदार सीढ़ियां इस घाट को सबसे अधिक फोटोजेनिक घाटों में से एक बनाती हैं।
✅ सुबह के समय जाएं जब दक्षिण भारतीय पुजारी विस्तृत अनुष्ठान करते हैं।
✅ घाटों की सैर के दौरान यह घाट दोपहर के भोजन के लिए आदर्श पड़ाव है — ऊपर की गलियों में उत्कृष्ट दक्षिण भारतीय भोजन उपलब्ध है।
✅ सुबह की नाव सवारी इस घाट को कवर करती है — अस्सी या दशाश्वमेध से बुक करें
✅ गर्मियों के महीनों में पानी और सूर्य सुरक्षा साथ ले जाएं
✅ श्मशान घाटों का सम्मान करें — फोटोग्राफी नहीं

🕐 सर्वोत्तम समय

मंदिर

सुबह 5 बजे - दोपहर 12 बजे, दोपहर 3 बजे - रात 9 बजे

घाट

24 घंटे

📍 कैसे पहुंचें

किसी भी प्रमुख घाट से नाव सवारी, या नदी किनारे पैदल चलें। ऑटो-रिक्शा पास की मुख्य सड़कों तक पहुंचते हैं।

🏛️ आसपास

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