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मानसरोवर घाट

मानसरोवर घाट

Mansarovar Ghat

मानसरोवर घाट

मानसरोवर घाट का निर्माण राजस्थान के अंबर के राजा मान सिंह द्वारा किया गया था और यह तिब्बत में पवित्र मानसरोवर झील के नाम पर रखा गया है, जो कैलाश पर्वत के तल पर स्थित है — भगवान शिव का निवास। इस घाट पर डुबकी लगाना स्वयं मानसरोवर में स्नान करने के आध्यात्मिक पुण्य के समान माना जाता है, जो उन लोगों के लिए दूरस्थ हिमालयी तीर्थयात्रा को सुलभ बनाता है जो इसे नहीं कर सकते। घाट में चौड़ी, अच्छी तरह से रखरखाव वाली सीढ़ियाँ हैं और सुबह के समय स्थानीय स्नानकर्ताओं के बीच लोकप्रिय है।

आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व

वाराणसी के घाटों की नामकरण परंपरा एक गहन आध्यात्मिक भूगोल को प्रकट करती है — शहर अपने नदी तट पर पूरे भारत के पवित्र स्थलों की नकल करता है। जिस प्रकार केदार घाट काशी में केदारनाथ को लाता है, उसी प्रकार मानसरोवर घाट हिंदू धर्म की सबसे पवित्र झील को गंगा के तट पर लाता है। राजा मान सिंह का संरक्षण इसे शक्तिशाली राजपूत वंश से जोड़ता है जो अंबर और बाद में जयपुर पर शासन करता था।

🪔 अंदरूनी सुझाव

✅ सुबह की डुबकी के लिए एक शांत स्थान।
✅ यह घाट अपने पड़ोसियों की तुलना में आमतौर पर कम भीड़भाड़ वाला होता है।
✅ ऊपर की गलियाँ दुकानों और भोजनालयों वाले व्यस्त मानसरोवर क्षेत्र से जुड़ती हैं।
✅ सुबह की नाव सवारी इस घाट को कवर करती है — अस्सी या दशाश्वमेध से बुक करें
✅ गर्मियों के महीनों में पानी और सूरज से सुरक्षा साथ ले जाएँ
✅ दाह संस्कार घाटों का सम्मान करें — कोई फोटोग्राफी नहीं

🕐 सर्वोत्तम समय

खुलने का समय

24 घंटे खुला

अनुशंसित यात्रा

सुबह जल्दी सबसे अच्छा

📍 कैसे पहुँचें

🚤

नाव से

किसी भी प्रमुख घाट से नाव सवारी

🚶

पैदल

नदी तट के साथ चलें

🛺

ऑटो से

ऑटो-रिक्शा पास की मुख्य सड़कों तक पहुँचते हैं

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