संगमरमर का यह मंदिर 1964 में उस स्थान पर बना जहाँ माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की। दीवारों पर मानस की चौपाइयाँ अंकित हैं और ऊपर रामायण की झाँकियाँ चलती हैं। दुर्गा कुंड के ठीक बगल में है।
दर्शन एवं आरती
त्वरित जानकारी
दर्शन के लिए सुबह अक्सर कम भीड़ होती है।
सुबह की आरती आमतौर पर 5–6 बजे; संध्या आरती सूर्यास्त पर।