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सावन में बनारस का ज़ायका: खिचड़ी प्रसाद से लेकर बनारसी पान तक

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

बनारस का खाना घड़ी के हिसाब से चलता है, और सावन में यह घड़ी थोड़ी बदल जाती है। महीने भर कई घरों में सात्विक भोजन बनता है, मंदिरों की रसोई देर तक चलती है, और गलियों की दुकानें भी व्रत और भोग दोनों के हिसाब से अपना मेन्यू ढाल लेती हैं। यही वजह है कि अगस्त का यह समय बनारस का स्वाद चखने के लिए सबसे दिलचस्प रहता है। शुरुआत वहीं से कीजिए जहाँ से श्रद्धालु करते हैं। कई शिव मंदिरों के पास मिलने वाला खिचड़ी प्रसाद सादा है, गर्म है और बेहद अपना-सा — चावल और दाल की एक थाली, जिसमें मसाले से ज़्यादा श्रद्धा का स्वाद होता है। इसके बाद चाट की बारी आती है। दशाश्वमेध के पास दीना चाट भंडार की टमाटर चाट और पालक पत्ता चाट के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं, वहीं कुछ ही कदम पर काशी चाट भंडार की अपनी अलग जमात है। दोनों की तुलना करना यहाँ का छोटा-मोटा शौक बन चुका है। सुबह का वक़्त कचौड़ी-सब्ज़ी का है। बच्चा पहलवान की दुकान बनारस की पहचान है — गरम कचौड़ी, पतली आलू की सब्ज़ी और मन हो तो जलेबी। बटर डोसा जैसी नई दुकानें बताती हैं कि शहर बाहर की चीज़ें अपनाता तो है, पर अपनी आवाज़ नहीं खोता। और अंत में बनारसी पान। गुलकंद, सौंफ और न जाने कितनी चीज़ों से भरा यह पान खड़े-खड़े, बातों के बीच खाया जाता है। सुझाव: खुले पैसे रखें, जहाँ लाइन लंबी हो वहीं खाएँ, और भूख लेकर निकलें।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार:

A Sawan Food Walk Through Banaras: Khichdi Prasad | HelloBanaras