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बनारसी जायका: ब्लू लस्सी, टमाटर चाट, मलइयो और कुल्हड़ वाली चाय का सफर

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

बनारस में खाना सिर्फ खाया नहीं जाता, जिया जाता है। मंदिरों और घाटों से आगे, पुरानी काशी की तंग गलियों में ऐसी दुकानें छिपी हैं जो पीढ़ियों से एक ही स्वाद परोस रही हैं। यही वजह है कि बनारस आने वाला हर यात्री यहां के जायके का भी तीर्थयात्री बन जाता है। शुरुआत कीजिए काशी विश्वनाथ मंदिर के पास कचौड़ी गली की मशहूर ब्लू लस्सी शॉप से, जहां करीब सौ साल से कुल्हड़ में गाढ़ी मलाईदार लस्सी फलों के साथ परोसी जाती है। कुछ ही दूरी पर दशाश्वमेध क्षेत्र में दीना चाट भंडार है, जिसकी टमाटर चाट का तीखा-चटपटा स्वाद काशी के अलावा कहीं नहीं मिलता। बनारस की दूध से बनी मिठाइयों की बात ही निराली है। सर्दियों में भोर के समय मिलने वाला मलइयो — केसर की खुशबू वाला हल्का झाग — मुंह में रखते ही घुल जाता है। बाकी मौसम में चौक और गोदौलिया के आसपास रबड़ी और दूध की दुकानें हर समय गुलजार रहती हैं। चाय के शौकीनों के लिए चौक की लक्ष्मी चाय वाले की दुकान किसी ठिकाने से कम नहीं, जहां कोयले पर सिंकी टोस्ट के साथ कुल्हड़ वाली चाय दशकों से बनारसियों की पहली पसंद बनी हुई है। बनारसी खाने का असली मजा पैदल घूमने में है — सुबह-सुबह या शाम की गंगा आरती के बाद गलियों में निकल जाइए, भूख साथ रखिए और खुशबू को रास्ता दिखाने दीजिए। महादेव की इस नगरी में हर मोड़ पर एक स्वाद आपकी यादों का हिस्सा बनने को तैयार है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: