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बनारसगिरी: वाराणसी की गलियों को कला, खान-पान और संगीत के उत्सव में बदलता जन-आंदोलन

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

पिछले कुछ समय से बनारसगिरी नाम का एक जन-संचालित स्ट्रीट फेस्टिवल वाराणसी के उत्सव मनाने के अंदाज़ को नया रूप दे रहा है। पहली बार 2025 में आयोजित इस उत्सव के अब तक कई संस्करण हो चुके हैं, जो सभागारों से निकलकर शहर के खुले सार्वजनिक स्थानों—फुटपाथ, पार्क और मोहल्लों के कोनों—को कुछ दिनों के लिए जीवंत सांस्कृतिक मंच बना देते हैं। विचार सरल है: शहर की जीवंत परंपराओं को खुले में लाना और सबको उसमें शामिल करना। हाल के संस्करणों में स्थानीय कारीगरों ने मिट्टी के बर्तन, हथकरघा बुनाई, कालीन और कांच के मनकों का काम दिखाया; बनारसी स्ट्रीट फूड—चाट, चाय, कुल्फी और लिट्टी-चोखा—के स्टॉल लगे; लोक संगीत गूँजा; और अखाड़ा कार्यशालाएँ तक हुईं। साथ ही बच्चों के रचनात्मक ज़ोन, ध्यान-कल्याण सत्र और नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच जैसी सेवाएँ भी चलीं। बनारसगिरी की सबसे खास बात यह है कि इसे शहरवासी खुद चलाते हैं। कारीगर, कलाकार, विक्रेता, स्वयंसेवी संस्थाएँ और स्वयंसेवक मिलकर इसे साकार करते हैं, जिससे कारीगरों को नए दर्शक और युवा बनारसियों को अपनी परंपराओं से सीधा जुड़ाव मिलता है। आगंतुकों के लिए यह घाटों से परे शहर को महसूस करने का आत्मीय अवसर है—काशी, खुलकर काशी का उत्सव मनाती हुई।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Indian Masterminds