अदालत के और क़रीब नि:शुल्क क़ानूनी मदद: बीएचयू विधि संकाय और न्यायपालिका के बीच साझेदारी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय का विधि संकाय न्यायपालिका के साथ मिलकर काम करने की तैयारी में है, और इसका असर सबसे पहले उन लोगों तक पहुँचना चाहिए जो वकील का ख़र्च नहीं उठा सकते। संकाय प्रमुख एवं संकायाध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने जो योजना रखी है, उसके तहत बीएचयू का लंबे समय से चल रहा विधिक सहायता एवं सेवा क्लिनिक अपना नि:शुल्क कामकाज बढ़ाएगा, और विद्यार्थी पाठ्यक्रम का ज़्यादा हिस्सा असली अदालतों में बिताएँगे। नियमित न्यायालय भ्रमण और अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप उसी क्लिनिकल लीगल एजुकेशन के साथ जुड़ेंगे, जो यह संकाय 1970 के दशक से पढ़ा रहा है — उस दौर से, जब देश के गिने-चुने विश्वविद्यालय ही ऐसा कर रहे थे। वाराणसी के लिए इसका सीधा मतलब है। शिक्षकों की देखरेख में विद्यार्थियों द्वारा चलाया जाने वाला नि:शुल्क विधिक सहायता क्लिनिक शहर की उन थोड़ी-सी जगहों में है, जहाँ रुकी हुई पेंशन, ज़मीन-जायदाद के उलझे मामले या समझ में न आने वाले मुक़दमे को लेकर कोई भी व्यक्ति बिना फ़ीस दिए योग्य सलाह पा सकता है। क्लिनिक बढ़ेगा तो ऐसी सलाह के घंटे भी बढ़ेंगे। क्लिनिक का काम परिसर की चारदीवारी से बाहर भी दिखा है: 2017 में बंदियों की दिहाड़ी को लेकर उसकी जनहित पहल के बाद प्रदेश सरकार ने दरें संशोधित की थीं। संकाय राष्ट्रीय रैंकिंग में हाल के अच्छे प्रदर्शन का भी हवाला देता है। पचास साल पुरानी इस परंपरा को सेमिनार कक्ष तक सीमित रखने के बजाय अदालतों से जोड़ देना ही इस नई व्यवस्था का असल मक़सद है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Amar Ujala