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काशी का केदारनाथ: केदार घाट पर विराजमान गौरी केदारेश्वर महादेव, जहाँ दर्शन से मिलता है हिमालय जैसा पुण्य

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

काशी की गलियों में बसे सैकड़ों मंदिरों में केदार घाट के ऊपर स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर का स्थान अनूठा है। भगवान शिव और माता गौरी को समर्पित यह मंदिर काशी के प्राचीन केदार खंड का प्रमुख देवस्थान माना जाता है और शिव उपासना के सबसे पुराने केंद्रों में गिना जाता है। श्रद्धालुओं की आस्था है कि यहाँ दर्शन-पूजन का फल हिमालय स्थित केदारनाथ धाम की यात्रा के बराबर मिलता है। जो भक्त पहाड़ों की कठिन यात्रा नहीं कर पाते, उनके लिए केदार घाट का यह दर्शन ही केदारनाथ बन जाता है — इसीलिए इसे प्यार से 'काशी का केदारनाथ' कहा जाता है। गंगा की ओर से यह मंदिर दूर से ही पहचान में आ जाता है — लाल और सफ़ेद धारियों वाली इसकी दीवारें दक्षिण भारतीय भक्ति परंपरा की झलक देती हैं और इसकी सीढ़ियाँ सीधे गंगा तक उतरती हैं। भोर का दृश्य तो अद्भुत होता है — घाट पर स्नान कर श्रद्धालु सीढ़ियाँ चढ़कर बाबा के दर्शन को पहुँचते हैं। सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि पर यहाँ की छटा देखते ही बनती है — 'हर हर महादेव' के जयघोष के साथ भक्तों की लंबी कतारें घाट तक फैल जाती हैं और मंदिर दीपों और गेंदे के फूलों से सज उठता है। दशाश्वमेध या अस्सी घाट से घाट-घाट पैदल चलकर, या सोनारपुरा की गलियों से होकर केदार घाट आसानी से पहुँचा जा सकता है। सूर्योदय की नौका यात्रा के साथ यह दर्शन जोड़ लें, तो यह काशी के सबसे शांत और भावपूर्ण आध्यात्मिक अनुभवों में से एक बन जाता है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: