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जापानी स्वर में 'हर हर महादेव': सारनाथ, नमो घाट और धाम तक पहुँचा यामानाशी का प्रतिनिधिमंडल

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

इस सप्ताहांत श्री काशी विश्वनाथ धाम के गलियारों में औपचारिक सूट पहने पंद्रह मेहमानों का एक समूह खड़ा था — गले में रुद्राक्ष की माला और सावन की भीड़ के साथ 'हर हर महादेव' का उद्घोष। इसके लिए वे बहुत दूर से आए थे। ये मेहमान जापान के यामानाशी प्रांत से आए 109 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ सदस्य थे, जिसका नेतृत्व राज्यपाल कोतारो नागासाकी कर रहे थे। प्रतिनिधिमंडल 22 अगस्त की दोपहर वाराणसी पहुँचा और वहीं से शुरुआत की, जहाँ से पहली बार आने वाले कई यात्री करते हैं — सारनाथ, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था और जो जापानी यात्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है। उसी शाम उन्होंने नमो घाट से गंगा आरती देखी, और उसके बाद के आयोजन में भारतीय कला, हस्तशिल्प और स्वाद से परिचय हुआ। धाम के दर्शन इसके बाद हुए, जो मंदिर न्यास के सहयोग से कराए गए। काशी में बीते ये दिन केवल पर्यटन के नहीं थे। यामानाशी और उत्तर प्रदेश ने इन्हीं दिनों में एक लंबी साझेदारी पर बात की — ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, बुनियादी ढाँचा, पर्यटन और कौशल प्रशिक्षण। राज्यपाल नागासाकी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, यामानाशी और जापान के रिश्ते दीर्घकाल में और मज़बूत होंगे, और ग्रीन हाइड्रोजन पर टिकी ऊर्जा सुरक्षा को उन्होंने व्यापक शांति के उद्देश्य से जोड़ा। बनारस के लिए यह यात्रा उसी बात की याद है, जो यह शहर बहुत लंबे समय से जानता है: सारनाथ की एक सुबह और घाट की एक शाम वे बातचीत खोल देती हैं, जो बैठक का कोई कमरा नहीं खोल पाता।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Free Press Journal · IANS · Live Aaryaavart