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सावन की काशी: जब घाटों पर उतरती है भोलेनाथ की भक्ति

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

काशी को समय से पुरानी नगरी कहा जाता है, और सावन के महीने में यह बात सबसे गहराई से महसूस होती है। बारिश में घाटों की सीढ़ियाँ गहरी पड़ जाती हैं, गंगा अपने पूरे वेग में बहती हैं, और पुरानी गलियों में "हर हर महादेव" का स्वर लगातार गूँजता रहता है। शिव के इस प्रिय महीने में बनारस का मिज़ाज ही बदल जाता है। सावन में काशी का दिन सुबह से शुरू होता है। श्रद्धालु भोर में घाट पर स्नान करते हैं, फिर जल, बेलपत्र और फूल लेकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ते हैं। सोमवार को भीड़ सबसे अधिक रहती है, इसलिए यदि शांत दर्शन चाहिए तो सप्ताह के बीच का दिन या तड़के का समय बेहतर रहता है। विश्वनाथ धाम परिसर में बैठने की जगह मिल जाती है, और गोदौलिया, भेलूपुर की छोटी शिव मंडलियाँ भी अपने आप में सुंदर अनुभव देती हैं। बरसात में यात्रा की तैयारी थोड़ी अलग होती है। अगस्त में गंगा का जलस्तर बढ़ता है, इसलिए नौका संचालन और नीचे की सीढ़ियों तक पहुँच रोज़ बदल सकती है — नाव लेने से पहले स्थानीय जानकारी अवश्य लें। पत्थर की सीढ़ियाँ फिसलन भरी होती हैं, इसलिए सही जूते और एक हल्का छाता साथ रखना समझदारी है। ठहरने के लिए अस्सी और दशाश्वमेध क्षेत्र के गेस्ट हाउस गंगा आरती के सबसे नज़दीक पड़ते हैं, जबकि कैंट के होटल आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक हैं। बनारस धीरे चलने वालों का शहर है — और सावन में यह बात दुगनी सच हो जाती है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार:

Kashi in Sawan: Why Varanasi's Monsoon Month Is the | HelloBanaras