काशी की 'ग्रीन आर्मी': मंदिर के वस्त्रों से रोज़गार और स्वच्छ गंगा
वाराणसी की एक शांत लेकिन प्रेरक पहल यह दिखा रही है कि गंगा की देखभाल और रोज़गार सृजन साथ-साथ चल सकते हैं। मंदिरों और तीर्थयात्रा में चढ़ाए गए पुराने वस्त्र — जो कभी नदी में बहकर पहुँच जाते थे — अब इकट्ठा करके 'ग्रीन आर्मी' नामक समूह को सौंपे जा रहे हैं, जिसमें लगभग 250 ग्रामीण महिलाएँ इस कपड़े को मज़बूत, पर्यावरण-अनुकूल थैलों में बदल देती हैं। युवाओं द्वारा संचालित होप वेलफेयर फाउंडेशन के नेतृत्व में इस पहल ने अब तक एक लाख से अधिक मुफ़्त अपसाइकिल थैले स्थानीय बाज़ारों तक पहुँचाए हैं, जिससे ग्राहकों को प्लास्टिक-मुक्त विकल्प और महिलाओं को स्थिर आय व सम्मान दोनों मिलते हैं। इस प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर समूह अब थैलों से आगे बढ़कर मोटे कंबल और गर्म शॉल भी सिल रहा है, जो सर्दियों में बेघर लोगों को दिए जाएँगे। यह ऐसी चक्रीय, समुदाय-आधारित सोच है जो काशी पर बख़ूबी फबती है: कुछ भी पवित्र बर्बाद नहीं होता, नदी साफ़ रहती है और ग्रामीण महिलाओं को घर के पास ही हुनर और कमाई मिलती है। स्थानीय लोगों और आगंतुकों के लिए ऐसा एक अपसाइकिल बनारसी थैला ख़रीदना गंगा और शहर की परंपराओं को थामे हाथों — दोनों का साथ देने का एक छोटा, सुखद तरीका है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: The Logical Indian