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सावन में श्री काशी विश्वनाथ धाम: ज्योतिर्लिंग का इतिहास, महिमा और दर्शन की पूरी जानकारी

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है और इसके हृदय में विराजते हैं बाबा श्री काशी विश्वनाथ। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का स्थान सर्वोपरि माना गया है। सावन के पवित्र महीने में यहां का वातावरण हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठता है और देश-विदेश से लाखों शिवभक्त बाबा के दर्शन के लिए काशी पहुंचते हैं। मंदिर का इतिहास काशी की तरह ही प्राचीन और उतार-चढ़ाव से भरा है। वर्तमान मंदिर का निर्माण वर्ष 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह के सहयोग से शिखर पर स्वर्ण मढ़वाया गया, इसीलिए इसे काशी का स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है। मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी है और यहां देह त्यागने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर में दिन की शुरुआत भोर की मंगला आरती से होती है, जिसका अनुभव भक्तों के लिए जीवन भर की पूंजी बन जाता है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद दर्शन पहले से कहीं सरल हो गए हैं। अब श्रद्धालु ललिता घाट पर गंगा स्नान कर विशाल प्रांगण से होते हुए सीधे मंदिर तक पहुंच सकते हैं। परिसर में यात्री सुविधा केंद्र, स्पष्ट मार्ग और हर कदम पर व्यवस्था उपलब्ध है। यदि आप इस सावन बाबा के दर्शन की योजना बना रहे हैं तो सुबह जल्दी पहुंचें, सोमवार को अधिक भीड़ की संभावना रहती है। मोबाइल और चमड़े की वस्तुएं बाहर लॉकर में जमा करके ही प्रवेश करें। काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन केवल एक परंपरा नहीं, इस नगरी की धड़कन हैं। हर हर महादेव!

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार:

Kashi Vishwanath Jyotirlinga in Sawan: History | HelloBanaras