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बीएचयू में आठ ज़िलों के नब्बे शिक्षक सम्मानित: शिक्षक दिवस से पहले शिक्षा पर संगोष्ठी

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

काशी में शिक्षक दिवस का मौसम रविवार को कुछ पहले ही शुरू हो गया — काशी हिंदू विश्वविद्यालय का एक सभागार शिक्षकों से भरा रहा। सामाजिक विज्ञान संकाय के संबोधि सभागार में भारत की शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों और संभावनाओं पर संगोष्ठी हुई, जिसका आयोजन प्रोफ़ेसर हरिहरनाथ त्रिपाठी फ़ाउंडेशन ने किया। अंत में वाराणसी समेत आठ ज़िलों से आए नब्बे शिक्षकों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। बातचीत नीति की ऊँचाइयों पर नहीं, ज़मीन पर टिकी रही। वक्ताओं ने कहा कि किसी बच्चे के शैक्षणिक, सामाजिक और नैतिक विकास में शिक्षक की भूमिका का कोई विकल्प नहीं है, और शिक्षा को व्यापार की तरह नहीं, चरित्र-निर्माण की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। कई वक्ता बार-बार गाँव और शहर की कक्षाओं के फ़र्क़ पर लौटे और कहा कि बदलते समय के हिसाब से शिक्षा नीति को फिर से गढ़ा जाए, ताकि गाँव के स्कूल के बच्चे को किसी और ही पैमाने पर न तौला जाए। प्रो. अंजलि वाजपेयी, प्रो. धीरज किशोर, प्रो. सरोज उपाध्याय, प्रो. सुप्रिया सिंह और प्रो. विभा राय ने अपनी बात रखी, जबकि कार्यक्रम का संयोजन प्रो. क्षेमेंद्र मणि त्रिपाठी ने किया। शिक्षक दिवस 5 सितंबर को है, और बीएचयू का यह सम्मान उससे हफ़्ता भर पहले हुआ — नब्बे शिक्षक कंधे पर अंगवस्त्र डाले संबोधि से निकले, और स्कूल का पूरा एक हफ़्ता अभी उनके आगे था।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: KTV Varanasi