Skip to content

काशी की एक आदर्श सुबह: संकट मोचन से अस्सी घाट की नौका विहार तक मंदिर यात्रा

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

वाराणसी अपने गंगा किनारे के सूर्योदय के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन जो यात्री शहर के दक्षिणी हिस्से में एक सरल मंदिर यात्रा की योजना बनाते हैं, उन्हें काशी एक अलग ही अनुभव देती है। एक सुव्यवस्थित सुबह में चार प्रिय धरोहर स्थलों के दर्शन हो सकते हैं और अंत में नौका विहार का आनंद भी। यात्रा की शुरुआत संकट मोचन हनुमान मंदिर से करें, जिसकी स्थापना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी, ऐसी मान्यता है। सुबह के समय यहां का वातावरण शांत रहता है और बेसन के लड्डू के प्रसाद की सुगंध चारों ओर फैली रहती है। वहां से कुछ ही दूरी पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में स्थित नया विश्वनाथ मंदिर है। हरे-भरे रास्तों के बीच बना यह संगमरमर का मंदिर, जिसे बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है, भारत के सबसे ऊंचे मंदिरों में से एक है। इसके बाद दुर्गाकुंड के पास स्थित दुर्गा मंदिर पहुंचें — अठारहवीं शताब्दी का यह लाल गेरुए रंग का भव्य मंदिर शहर के सबसे पुराने मोहल्लों में से एक की पहचान है। थोड़ा आगे बढ़ने पर अस्सी घाट आता है, जो दक्षिण दिशा का अंतिम प्रमुख घाट है और अपनी सुबह की आरती, योग सत्रों और खुले वातावरण के लिए जाना जाता है। यात्रा का समापन अस्सी घाट से नाव की सवारी के साथ करें और समय हो तो नमो घाट भी जाएं — यह शहर का सबसे नया और विशाल रिवरफ्रंट है, जहां हाथ जोड़े नमस्कार मुद्रा की विशाल आकृतियां, खान-पान के स्टॉल और शाम की रौनक मन मोह लेती है। पूरा परिक्रमा पथ आराम से चार-पांच घंटे में पूरा हो जाता है। पानी साथ रखें, मंदिर दर्शन के लिए मर्यादित वस्त्र पहनें और प्रसाद व नाव किराए के लिए खुले पैसे रखना न भूलें।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: