गुलाब, बेला और मखमल: सावन की विदाई पर बाबा विश्वनाथ को बंधीं बीस से ज़्यादा राखियाँ
शुक्रवार को रक्षाबंधन पर श्री काशी विश्वनाथ धाम का गर्भगृह सज गया, और दिन की पहली राखी ज्योतिर्लिंग को ही बंधी। भोर की मंगला आरती से पहले गुलाब, बेला और मखमली कपड़े से बनी राखी बाबा विश्वनाथ को अर्पित की गई। अनुष्ठान पूरा होते-होते गर्भगृह में बीस से ज़्यादा राखियाँ रखी जा चुकी थीं — काशी की वह परंपरा, जिसमें जिस दिन देश भर में घरों में राखी बंधती है, उस दिन शहर अपने आराध्य को ही भाई मानकर धागा बांधता है। दोपहर में भोग आरती हुई और शृंगार दर्शनार्थियों के लिए बना रहा। मंदिर सावन पूर्णिमा को विशेष दिनों में गिनता है, इसलिए बुकिंग की सामान्य पाबंदियाँ हटा दी गईं और धाम के द्वार सीधे दर्शन के लिए खुले रहे। सुबह से कतारें बढ़ती गईं — शहर की गलियों से और ज़िले के बाहर से आईं महिलाएँ अपने भाइयों की कुशलता की कामना कर आगे बढ़ती रहीं। इस बार दिन का महत्व दोहरा था। सावन इसी पूर्णिमा को विदा हो रहा है, यानी महीने का आख़िरी दर्शन और रक्षाबंधन एक साथ पड़े — पंडितों और पंचांगकारों ने इसे दोहरे शुभ संयोग के रूप में देखा। शाम को झूलनोत्सव का शृंगार हुआ, जिसमें सावन की विदाई पर बाबा झूले पर विराजते हैं; भीड़ सबसे ज़्यादा इसी समय उमड़ी।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Amar Ujala