सावन में बाबा विश्वनाथ का दरबार: कतार में खड़े श्रद्धालुओं के लिए क्या-क्या इंतज़ाम
सावन का महीना काशी का मिज़ाज ही बदल देता है। पूरे महीने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए पहुँचते हैं और धाम के आसपास की गलियाँ भोर से पहले ही हर-हर महादेव के जयकारों से गूँज उठती हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, और उस ताप को शांत करने के लिए उन पर जल अर्पित किया गया — सावन में जलाभिषेक की परंपरा वहीं से जुड़ी मानी जाती है। इस मौसम में दर्शन की योजना बना रहे लोगों के लिए यह जानना उपयोगी है कि धाम में भीड़ प्रबंधन किस तरह किया गया है। स्थानीय श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग से काशी द्वार की व्यवस्था की गई है, जिससे बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों की मुख्य कतारों पर दबाव कम रहता है। परिसर के भीतर की तैयारियाँ सीधे लंबे इंतज़ार को ध्यान में रखकर की गई हैं। कतारों के साथ-साथ पीने के पानी की व्यवस्था है, और गर्मी या भीड़ में कमज़ोरी महसूस होने पर ग्लूकोज़ तथा ओआरएस उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रतीक्षा क्षेत्र के बड़े हिस्से पर जर्मन हैंगर और टेंसिल स्ट्रक्चर लगाए गए हैं, जो बारिश और धूप दोनों से बचाव करते हैं, जबकि जगह-जगह लगे मिस्ट फैन उमस से राहत देते हैं। परिवारों के लिए एक ख़ास सुविधा — धाम परिसर में बेबी फीडिंग कैबिन बनाए गए हैं, ताकि छोटे बच्चों के साथ आने वाली माताओं को सुरक्षित और निजी जगह मिल सके। सावन के सोमवारों पर मंदिर प्रशासन ने आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत पुष्पवर्षा से किया है। व्यावहारिक सलाह — जल्दी पहुँचें, सामान कम रखें और पानी व पहचान पत्र पास रखें।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: