सावन से पहले ही शिवमय हुई काशी: विश्वनाथ धाम में उमड़े श्रद्धालु, गंगा का जलस्तर भी बढ़ा
सावन का पवित्र महीना अभी विधिवत शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन काशी अभी से शिवभक्ति के रंग में रंग चुकी है। काशी विश्वनाथ धाम की ओर जाने वाली गलियों में देशभर से आए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है और गोदौलिया से लेकर मंदिर परिसर तक "हर हर महादेव" का उद्घोष गूंज रहा है। भगवान शिव को समर्पित सावन वैसे भी काशी का सबसे जीवंत समय होता है, और इस बार उत्साह समय से पहले ही चरम पर पहुंचता दिख रहा है। बढ़ती भीड़ के साथ-साथ मानसून के कारण गंगा का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से घाटों का स्वरूप बदल जाता है — निचली सीढ़ियां धीरे-धीरे जल में समा जाती हैं, नावें किनारों के और पास बांधी जाती हैं और संध्या गंगा आरती ऊंचे चबूतरों पर होने लगती है। लहराती हुई भरी-पूरी गंगा और प्राचीन घाटों का यह दृश्य भारत के सबसे मनोरम मानसूनी नज़ारों में से एक है। सावन में दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालु कुछ व्यावहारिक बातें ध्यान रखें। सावन के सोमवार को विश्वनाथ मंदिर में सबसे लंबी कतारें लगती हैं, इसलिए अन्य दिनों में सुबह जल्दी दर्शन करना सुविधाजनक रहता है। बैरिकेडिंग वाले निर्धारित मार्ग का पालन करें और घाटों पर लगी सुरक्षा रस्सियों का सम्मान करें, क्योंकि जलस्तर बढ़ने के साथ स्नान क्षेत्र बदलते रहते हैं। इस मौसम की असली पहचान इसका वातावरण है — केसरिया वस्त्रों में कांवरिये, रुद्राक्ष और बेलपत्र की दुकानें, और घाटों पर गूंजते भजन। काशी में सावन केवल पंचांग का एक महीना नहीं, बल्कि इस शहर की धड़कन है — और यह धड़कन अभी से तेज़ हो चुकी है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: