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झूले पर छह घंटे के दर्शन: रक्षाबंधन पर टेढ़ी नीम से धाम तक निकलेगी बाबा विश्वनाथ की रजत प्रतिमा

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

काशी में सावन का समापन उसी परंपरा से होता है — झूले पर विराजे बाबा विश्वनाथ के दर्शन से। 28 अगस्त, शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन एक साथ पड़ रहे हैं। टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास में रखी बाबा की रजत प्रतिमा शोभायात्रा के साथ श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुँचेगी, जहाँ उन्हें झूले पर विराजमान कर लगभग छह घंटे तक दर्शन कराए जाएँगे। तैयारी एक दिन पहले से शुरू होती है। 27 अगस्त को महंत आवास पर प्रतिमा का हरियाली से शृंगार होगा और वहीं पूजन के बाद यात्रा निकलेगी। शोभायात्रा पारंपरिक वाद्यों के साथ टेढ़ी नीम से चलकर गलियों से होते हुए धाम तक जाती है, इसलिए जो लोग मंदिर के भीतर नहीं पहुँच पाते, उन्हें रास्ते में ही दर्शन मिल जाते हैं। धाम में प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित कर पूजन किया जाएगा और सप्तर्षि आरती से पहले झूलनोत्सव होगा — मंदिर के एसडीएम शंभूशरण ने इसकी पुष्टि की है। शयन आरती के साथ आयोजन पूरा होगा और प्रतिमा वापस महंत आवास लौट जाएगी। व्यवस्था का समन्वय वाचस्पति तिवारी देख रहे हैं। जाने का मन हो तो यह मानकर चलिए कि धाम और आसपास की गलियाँ सबसे अधिक भरी रहेंगी — सावन का यह आख़िरी बड़ा दिन है और उस पर रक्षाबंधन की भीड़ भी। रास्ते में शोभायात्रा के दर्शन करना अपेक्षाकृत आसान रहेगा।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: Amar Ujala — Varanasi