काशी यात्रा गाइड 2026: सुबह-ए-बनारस से गंगा आरती तक, दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहर की सैर
वाराणसी — जिसे श्रद्धालु काशी और स्थानीय लोग प्यार से बनारस कहते हैं — दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में गिना जाता है। गंगा किनारे अर्धचंद्राकार में बसे इस शहर में अध्यात्म, इतिहास, स्वाद और रोज़मर्रा की ज़िंदगी घाटों पर एक साथ साँस लेती है। यही कारण है कि देश-विदेश से यात्री यहाँ बार-बार खिंचे चले आते हैं। बनारस को समझने की शुरुआत भोर से कीजिए। अस्सी या दशाश्वमेध घाट से सूर्योदय के समय नौका विहार पर निकलिए — घाटों की लंबी श्रृंखला, मंदिरों के शिखर और स्नान-ध्यान करते श्रद्धालुओं का दृश्य मन में हमेशा के लिए बस जाता है। इसी अनुभव को लोग 'सुबह-ए-बनारस' कहते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन यात्रा का केंद्र हैं। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक इस मंदिर तक अब विश्वनाथ धाम कॉरिडोर से पहुँचना बेहद सुगम हो गया है। शाम को दशाश्वमेध घाट की भव्य गंगा आरती अवश्य देखें — शंखनाद, घंटियों और दीपों की लय में सजी यह आरती हज़ारों लोगों को एक साथ भाव-विभोर कर देती है। अच्छी जगह के लिए थोड़ा पहले पहुँचें या नाव से आरती निहारें। घाटों के बीच पुरानी गलियों का स्वाद लेना न भूलें — कचौड़ी-सब्ज़ी का नाश्ता, चटपटी टमाटर चाट, गर्म जलेबी, कुल्हड़ वाली गाढ़ी लस्सी और बनारसी पान। यात्रा के लिए दो-तीन दिन रखें, गलियों में पैदल चलने के लिए आरामदायक जूते पहनें और शहर को इत्मीनान से जीने का भाव लेकर आएँ। काशी हर आने वाले को अपना बना लेती है।
हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: