वाराणसी रथ यात्रा 2026: तिथियाँ, मार्ग और उत्सव
Varanasi Rath Yatra 2026: Dates, Route & Celebrations
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वाराणसी रथ यात्रा 2026 गाइड
काशी की पवित्र गलियों में भव्य रथ यात्रा का अनुभव करें।
वाराणसी में वार्षिक रथ यात्रा हजारों श्रद्धालुओं को असी घाट के पास के मंदिरों से दशाश्वमेध की ओर खींचती है। 2026 में यह पर्व मानसून के मौसम में होगा, जिससे घाटों पर ठंडी शामें और भीलूपुर-लंका की भीड़ भरी गलियाँ और भी जीवंत होंगी।
एक नज़र में
यात्रा कहाँ देखें
शहर भर के मुख्य दृश्य स्थल और मंदिर पड़ाव।
असी घाट प्रारंभ
यात्रा दक्षिणी छोर असी घाट और तुलसी मानस मंदिर से शुरू होती है।
दशाश्वमेध घाट
मुख्य पड़ाव पर आरती और घाट की सीढ़ियों पर भारी भीड़।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर
रथ शाम की पूजा से पहले विस्तारित कॉरिडोर से गुजरते हैं।
बीएचयू परिसर
शाम को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विश्वनाथ मंदिर के पास अंतिम पड़ाव।
यात्रा समयरेखा
ध्वजारोहण
श्रद्धालु असी घाट पर ceremonially शुरुआत के लिए एकत्र होते हैं।
लंका मार्ग
रथ लंका और भीलूपुर की भीड़ भरी गलियों से उत्तर की ओर बढ़ते हैं।
दशाश्वमेध ठहराव
मुख्य घाट पर विशेष प्रार्थना और अर्पण।
काशी विश्वनाथ
अंतिम दर्शन और वापसी यात्रा शुरू।
यहाँ रहने वालों के सुझाव
सबसे अच्छा समय
भीड़ बढ़ने से पहले सुबह जल्दी घाट पर पहुँचकर अच्छी जगह सुरक्षित करें।
कैसे पहुँचें
कैंटोनमेंट या सिगरा से साइकिल रिक्शा लें; यात्रा मार्ग के पास निजी वाहन से बचें।
क्या साथ लाएँ
हल्के सूती कपड़े, पानी की बोतल और घाट की सीढ़ियों पर बैठने के लिए छोटा आसन।
स्थानीय शिष्टाचार
आरती के दौरान सम्मान बनाए रखें; देवताओं के पास फ्लैश फोटोग्राफी से बचें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाराणसी में रथ यात्रा 2026 कब है?
पर्व आमतौर पर हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार जून या जुलाई में पड़ता है; सटीक तिथियाँ स्थानीय मंदिरों द्वारा कुछ महीने पहले घोषित की जाती हैं।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा भीड़ होती है?
असी घाट, दशाश्वमेध घाट और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में सबसे बड़ी भीड़ जमा होती है।
क्या वरिष्ठ नागरिक यात्रा में शामिल हो सकते हैं?
हाँ, लेकिन मणिकर्णिका के पास संकरी गलियाँ चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं; असी या नाव से देखना आसान है।
क्या पर्यटक रथ खींचने में शामिल हो सकते हैं?
श्रद्धालु मंदिर के पर्यवेक्षण में प्रतीकात्मक मदद कर सकते हैं, लेकिन व्यवस्थित खींचाई पुजारियों द्वारा संभाली जाती है।
सारनाथ में कोई विशेष व्यवस्था है?
बौद्ध तीर्थयात्री अगले दिन सारनाथ जाते हैं; मुख्य हिंदू रथ यात्रा शहर के घाटों तक सीमित रहती है।