त्योहार गाइड
बुद्ध पूर्णिमा 2026
बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाई जाती है।
संपन्न
- तिथि
- शुक्र, 1 मई 2026
- तिथि
- पूर्णिमा · गुरु, 30 अप्रैल, 9:12 अपराह्न – 10:53 अपराह्न
दिन की योजना
शुभ समय और बचने योग्य समय
· वाराणसी का समय (भारतीय समय)
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त44मि
- अमृत काल1घं 45मि
इन समयों से बचें
- दुर्मुहूर्त52मि
- राहु काल1घं 38मि
- दुर्मुहूर्त52मि
- यम गण्डम1घं 38मि
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 5:22 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:28 अपराह्न
- चंद्रोदय
- 6:22 अपराह्न
- चंद्रास्त
- 5:15 पूर्वाह्न
पर्व का दिन
शुक्र, 1 मई का पंचांग
- तिथि
- पूर्णिमा, फिर प्रतिपदा
- नक्षत्र
- स्वाति
- योग
- सिद्धि
- करण
- विष्टि
- पक्ष
- शुक्ल
- मास
- वैशाख
- तिथि
- पूर्णिमाआरंभ समाप्त फिर प्रतिपदासमाप्त
- नक्षत्र
- स्वातिआरंभ समाप्त
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
- कालबचें
- रोगबचें
- शुभउत्तम
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
रात
- रोगबचें
- कालबचें
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
- रोगबचें
कहानी
बुद्ध पूर्णिमा: महत्व और अनुष्ठान
वैशाख पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह त्योहार बौद्धों और हिंदुओं दोनों के लिए पवित्र है (बुद्ध विष्णु के 9वें अवतार माने जाते हैं)।
अनुष्ठान
बौद्ध मंदिरों और मठों में जाएँ। ध्यान करें और अष्टांगिक मार्ग का अभ्यास करें। बुद्ध प्रतिमाओं पर फूल, अगरबत्ती और मोमबत्तियाँ अर्पित करें। दान और करुणा का अभ्यास करें।
स्थानीय रंग
वाराणसी में बुद्ध पूर्णिमा
वाराणसी से मात्र 10 किमी दूर सारनाथ वह स्थान है जहाँ बुद्ध ने अपना पहला उपदेश (धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त) दिया। बुद्ध पूर्णिमा पर दुनिया भर से हज़ारों तीर्थयात्री धामेक स्तूप और मूलगंध कुटी विहार में एकत्र होते हैं।
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