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त्योहार गाइड

बुद्ध पूर्णिमा 2025

बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाई जाती है।

संपन्न
तिथि
सोम, 12 मई 2025
तिथि
पूर्णिमा · रवि, 11 मई, 8:02 अपराह्न – 10:25 अपराह्न

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त43मि
  • अमृत काल1घं 47मि · अगले दिन तक

इन समयों से बचें

  • राहु काल1घं 40मि
  • यम गण्डम1घं 40मि
  • दुर्मुहूर्त53मि
  • दुर्मुहूर्त53मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
5:14 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
6:34 अपराह्न
चंद्रोदय
6:30 अपराह्न
चंद्रास्त
5:10 पूर्वाह्न

पर्व का दिन

सोम, 12 मई का पंचांग

तिथि
पूर्णिमा, फिर प्रतिपदा
नक्षत्र
स्वाति
योग
वरीयान
करण
विष्टि
पक्ष
शुक्ल
मास
वैशाख
तिथि
पूर्णिमाआरंभ समाप्त फिर प्रतिपदासमाप्त
नक्षत्र
स्वातिआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • अमृतउत्तम
  • कालबचें
  • रोगबचें
  • शुभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम

रात

  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य

कहानी

बुद्ध पूर्णिमा: महत्व और अनुष्ठान

वैशाख पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह त्योहार बौद्धों और हिंदुओं दोनों के लिए पवित्र है (बुद्ध विष्णु के 9वें अवतार माने जाते हैं)।

अनुष्ठान

बौद्ध मंदिरों और मठों में जाएँ। ध्यान करें और अष्टांगिक मार्ग का अभ्यास करें। बुद्ध प्रतिमाओं पर फूल, अगरबत्ती और मोमबत्तियाँ अर्पित करें। दान और करुणा का अभ्यास करें।

स्थानीय रंग

वाराणसी में बुद्ध पूर्णिमा

वाराणसी से मात्र 10 किमी दूर सारनाथ वह स्थान है जहाँ बुद्ध ने अपना पहला उपदेश (धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त) दिया। बुद्ध पूर्णिमा पर दुनिया भर से हज़ारों तीर्थयात्री धामेक स्तूप और मूलगंध कुटी विहार में एकत्र होते हैं।

आगे देखें

बुद्ध पूर्णिमा पर और