त्योहार गाइड
चैत्र नवरात्रि 2029
चैत्र नवरात्रि हिंदू नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का उत्सव है।
- तिथियाँ
- 14 – 23 अप्रैल 2029 · पर्व के 9 दिन
- मुख्य मुहूर्त
- घटस्थापना मुहूर्त · शनि, 14 अप्रैल · 5:36 – 9:51 पूर्वाह्न
दिन की योजना
शुभ समय और बचने योग्य समय
· वाराणसी का समय (भारतीय समय)
शुभ मुहूर्त
- घटस्थापना अभिजित मुहूर्त51मि
- ब्रह्म मुहूर्त45मि
- अमृत काल1घं 48मि
इन समयों से बचें
- दुर्मुहूर्त51मि · घटस्थापना मुहूर्त के समय से टकराता है
- दुर्मुहूर्त51मि · घटस्थापना मुहूर्त के समय से टकराता है
- राहु काल1घं 35मि · घटस्थापना मुहूर्त के समय से टकराता है
- यम गण्डम1घं 35मि
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 5:36 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:20 अपराह्न
- चंद्रास्त
- 6:46 अपराह्न
दिन-ब-दिन
चैत्र नवरात्रि के 9 दिन
दिन 1मुख्य मुहूर्त · 5:36 – 9:51 पूर्वाह्न
घटस्थापना
रंग स्लेटीमाँ शैलपुत्री
देवी दुर्गा का प्रथम स्वरूप। हिमालय की पुत्री, वे वृषभ नंदी पर सवार हैं और त्रिशूल व कमल धारण करती हैं।
प्रसाद: शुद्ध देसी घी
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
- सूर्योदय
- 5:36 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:20 अपराह्न
- अभिजित
- 11:33 पूर्वाह्न – 12:24 अपराह्न
दिन 2
द्वितीया
रंग नारंगीमाँ ब्रह्मचारिणी
देवी का तपस्विनी स्वरूप जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।
प्रसाद: चीनी
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
- सूर्योदय
- 5:35 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:20 अपराह्न
- अभिजित
- 11:32 पूर्वाह्न – 12:23 अपराह्न
दिन 3
तृतीया
रंग सफ़ेदमाँ चंद्रघंटा
योद्धा स्वरूप जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है। वे बाघ पर सवार हैं और दस भुजाओं वाली हैं।
प्रसाद: दूध
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः
- सूर्योदय
- 5:34 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:21 अपराह्न
- अभिजित
- 11:32 पूर्वाह्न – 12:23 अपराह्न
दिन 4
चतुर्थी
रंग लालमाँ कूष्मांडा
अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली। उनका नाम 'ब्रह्मांडीय अंडा' है — उन्होंने अपनी हँसी से संसार बनाया।
प्रसाद: मालपुआ
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
- सूर्योदय
- 5:33 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:21 अपराह्न
- अभिजित
- 11:32 पूर्वाह्न – 12:23 अपराह्न
दिन 5
पंचमी
रंग रॉयल ब्लूमाँ स्कंदमाता
भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता। वे कमल पर विराजमान हैं, गोद में पुत्र के साथ, मातृ प्रेम का प्रतीक।
प्रसाद: केला
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
- सूर्योदय
- 5:32 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:22 अपराह्न
दिन 6
षष्ठी
रंग पीलामाँ कात्यायनी
ऋषि कात्यायन के यहाँ जन्मी, वे वह योद्धा स्वरूप हैं जिन्होंने महिषासुर का वध किया।
प्रसाद: शहद
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
- सूर्योदय
- 5:32 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:22 अपराह्न
- अभिजित
- 11:31 पूर्वाह्न – 12:23 अपराह्न
दिन 7
सप्तमी
रंग हरामाँ कालरात्रि
दुर्गा का सबसे उग्र स्वरूप — श्याम वर्ण, खुले केश। वे अज्ञान और अंधकार का नाश करती हैं।
प्रसाद: गुड़
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
- सूर्योदय
- 5:31 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:23 अपराह्न
- अभिजित
- 11:31 पूर्वाह्न – 12:22 अपराह्न
- 21 अप्रैल · पर्व जारी रहता है
दिन 8
अष्टमी
रंग मोरपंखी हरामाँ महागौरी
अत्यंत गौर व तेजस्वी स्वरूप। कठोर तपस्या के बाद शिव ने उन्हें गंगाजल से शुद्ध किया, जिससे वे श्वेत वर्ण हो गईं।
प्रसाद: नारियल
ॐ देवी महागौर्यै नमः
- सूर्योदय
- 5:29 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:24 अपराह्न
- अभिजित
- 11:30 पूर्वाह्न – 12:22 अपराह्न
दिन 9
नवमी
रंग बैंगनीमाँ सिद्धिदात्री
सभी सिद्धियों की दात्री। भगवान शिव ने भी उनकी कृपा से अपनी शक्तियाँ प्राप्त कीं।
प्रसाद: तिल
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
- सूर्योदय
- 5:28 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:24 अपराह्न
- अभिजित
- 11:30 पूर्वाह्न – 12:22 अपराह्न
घटस्थापना का दिन
शनि, 14 अप्रैल का पंचांग
- तिथि
- प्रतिपदा, फिर द्वितीया
- नक्षत्र
- अश्विनी
- योग
- विष्कम्भ
- करण
- किंस्तुघ्न
- पक्ष
- शुक्ल
- मास
- चैत्र
- तिथि
- प्रतिपदाआरंभ समाप्त फिर द्वितीयासमाप्त
- नक्षत्र
- अश्विनीआरंभ समाप्त
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- कालबचें
- शुभउत्तम
- रोगबचें
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
- कालबचें
रात
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
- रोगबचें
- कालबचें
- लाभउत्तम
कहानी
चैत्र नवरात्रि: महत्व और अनुष्ठान
यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है और नौवें दिन राम नवमी के साथ समाप्त होता है।
अनुष्ठान
पहले दिन सुबह के घटस्थापना मुहूर्त (प्रतिपदा रहते दिन का पहला तिहाई भाग) में, अन्यथा अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना करें। 9 दिन व्रत रखें। प्रतिदिन देवी के एक स्वरूप की विशेष रंग, प्रसाद और मंत्र से पूजा करें। नवमी को कन्या पूजा और हवन से समापन करें।
व्रत
9 दिन कठोर व्रत। कुछ लोग निर्जला (बिना पानी) व्रत रखते हैं, अन्य फल और दूध लेते हैं। हवन के बाद दशमी को व्रत तोड़ा जाता है।
स्थानीय रंग
वाराणसी में चैत्र नवरात्रि
वाराणसी में चैत्र नवरात्रि दुर्गा कुंड मंदिर और संकट मोचन मंदिर पर विशेष सजावट के साथ मनाई जाती है। काशी विश्वनाथ मंदिर में भव्य आरती होती है। घाटों को दीयों से सजाया जाता है और भक्त भोर में गंगा में पवित्र स्नान करते हैं।
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