त्योहार गाइड
छठ पूजा 2026
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक प्राचीन हिंदू त्योहार है।
- तिथियाँ
- 13 – 16 नवंबर 2026 · 4 दिन
- मुख्य मुहूर्त
- संध्या अर्घ्य · रवि, 15 नवंबर · 5:10 अपराह्न
दिन की योजना
शुभ समय और बचने योग्य समय
· वाराणसी का समय (भारतीय समय)
शुभ मुहूर्त
- उषा अर्घ्य (सूर्योदय, अगले दिन)0मि · अगले दिन
- ब्रह्म मुहूर्त52मि
- अमृत काल1घं 48मि
इन समयों से बचें
- यम गण्डम1घं 22मि
- दुर्मुहूर्त44मि
- राहु काल1घं 22मि · संध्या अर्घ्य के समय से टकराता है
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 6:14 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:10 अपराह्न
- चंद्रोदय
- 11:14 पूर्वाह्न
- चंद्रास्त
- 9:57 अपराह्न
दिन-ब-दिन
छठ पूजा के 4 दिन
दिन 1
नहाय खाय
पहला दिन: भक्त नदी में पवित्र स्नान करते हैं और एक समय भोजन करते हैं। घर की सफाई और शुद्धता से भोजन तैयार किया जाता है।
- सूर्योदय
- 6:13 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:10 अपराह्न
दिन 2
खरना (लोहंडा)
दूसरा दिन: भक्त दिन भर का व्रत रखते हैं और शाम को सूर्यास्त पूजा के बाद व्रत खोलते हैं। प्रसाद के रूप में खीर और रोटी तैयार की जाती है।
- सूर्योदय
- 6:14 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:10 अपराह्न
दिन 3मुख्य मुहूर्त · 5:10 अपराह्न
संध्या अर्घ्य
मुख्य दिन: डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य। भक्त सूप (बांस की टोकरी) में प्रसाद लेकर पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
- सूर्योदय
- 6:14 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:10 अपराह्न
दिन 4
उषा अर्घ्य (पारण)
अंतिम दिन: भोर में उगते सूर्य को उषा अर्घ्य। उषा अर्घ्य के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत खोला जाता है। परिवार और समुदाय में प्रसाद बाँटा जाता है।
- सूर्योदय
- 6:15 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:09 अपराह्न
संध्या अर्घ्य का दिन
रवि, 15 नवंबर का पंचांग
- तिथि
- षष्ठी, फिर सप्तमी
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा
- योग
- शूल
- करण
- कौलव
- पक्ष
- शुक्ल
- मास
- कार्तिक
- तिथि
- षष्ठीआरंभ समाप्त फिर सप्तमीसमाप्त
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ाआरंभ समाप्त
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
- कालबचें
- रोगबचें
- शुभउत्तम
- उद्वेगबचें
रात
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
- रोगबचें
- कालबचें
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
कहानी
छठ पूजा: महत्व और अनुष्ठान
मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में मनाया जाता है, भक्त पानी में खड़े होकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
अनुष्ठान
36 घंटे का निर्जला व्रत। ठेकुआ और प्रसाद तैयार करें। नदी या तालाब पर डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य। भोर में उगते सूर्य को उषा अर्घ्य। उषा अर्घ्य के बाद व्रत खोलें।
व्रत
हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक — 36 घंटे बिना खाने-पीने के। भक्त लंबे समय तक पानी में खड़े होकर प्रार्थना करते हैं।
स्थानीय रंग
वाराणसी में छठ पूजा
छठ पूजा वाराणसी के घाटों को अद्भुत दृश्य में बदल देती है। हज़ारों भक्त गंगा के किनारे हर घाट पर पंक्तिबद्ध होते हैं। दशाश्वमेध, अस्सी और तुलसी घाट पर संध्या और प्रातः अर्घ्य सबसे भव्य होते हैं।
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