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त्योहार गाइड

दिवाली 2024

दिवाली, दीपों का त्योहार, पाँच दिनों का उत्सव है जो रावण को हराने के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी का प्रतीक है।

संपन्न
तिथियाँ
29 अक्टूबर – 3 नवंबर 2024 · पर्व के 5 दिन
मुख्य मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त · शुक्र, 1 नवंबर · 5:17 – 6:17 अपराह्न

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त45मि
  • ब्रह्म मुहूर्त51मि
  • अमृत काल1घं 47मि

इन समयों से बचें

  • दुर्मुहूर्त45मि
  • राहु काल1घं 24मि
  • दुर्मुहूर्त45मि
  • यम गण्डम1घं 24मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
6:05 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
5:17 अपराह्न
चंद्रास्त
4:57 अपराह्न

दिन-ब-दिन

दिवाली के 5 दिन

  1. दिन 1

    धनतेरस

    धन का त्योहार। देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि इस दिन आयुर्वेद लेकर समुद्र से प्रकट हुए। लोग सोना, चाँदी और बर्तन खरीदते हैं।

    अनुष्ठान: सोना/चाँदी खरीदें, दीये जलाएँ, भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा करें

    सूर्योदय
    6:04 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:19 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: मंगल, 29 अक्टूबर
  2. 30 अक्टूबर · पर्व जारी रहता है
  3. दिन 2

    नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

    भगवान कृष्ण ने इस दिन नरकासुर राक्षस का वध किया। लोग सुबह से पहले उठकर तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) करते हैं और दीये जलाते हैं।

    अनुष्ठान: भोर से पहले तेल स्नान, 14 दीये जलाएँ, पटाखे फोड़ें

    सूर्योदय
    6:05 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:17 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: गुरु, 31 अक्टूबर
  4. दिन 3मुख्य मुहूर्त · 5:17 – 6:17 अपराह्न

    दिवाली (लक्ष्मी पूजा)

    दिवाली का मुख्य दिन — दीपों का त्योहार। भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे। समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा होती है।

    अनुष्ठान: प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा, दीये और मोमबत्तियाँ जलाएँ, रंगोली, नए कपड़े, मिठाइयाँ

    सूर्योदय
    6:05 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:17 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शुक्र, 1 नवंबर
  5. दिन 4

    गोवर्धन पूजा

    भगवान कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ग्रामवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया। इसे अन्नकूट भी कहते हैं — भगवान को भोजन का पर्वत अर्पित किया जाता है।

    अनुष्ठान: गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएँ, 56 प्रकार के भोजन (छप्पन भोग) बनाएँ, गौ पूजा करें

    सूर्योदय
    6:06 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:16 अपराह्न
    गोवर्धन पूजा मुहूर्त
    1:05 – 2:28 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शनि, 2 नवंबर
  6. दिन 5

    भाई दूज

    भाई-बहन के बंधन का उत्सव। यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना से मिलने गए, जिन्होंने उनके मस्तक पर तिलक लगाया।

    अनुष्ठान: बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाए, आरती करे, उपहार और मिठाइयाँ बाँटें

    सूर्योदय
    6:07 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:15 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: रवि, 3 नवंबर

दिवाली (लक्ष्मी पूजा) का दिन

शुक्र, 1 नवंबर का पंचांग

तिथि
अमावस्या, फिर प्रतिपदा
नक्षत्र
स्वाति
योग
प्रीति
करण
नाग
पक्ष
कृष्ण
मास
कार्तिक
तिथि
अमावस्याआरंभ समाप्त फिर प्रतिपदासमाप्त
नक्षत्र
स्वातिआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें
  • रोगबचें
  • शुभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य

रात

  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें

कहानी

दिवाली: महत्व और अनुष्ठान

यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है।

अनुष्ठान

5 दिन दीये और मोमबत्तियाँ जलाएँ। तीसरे दिन प्रदोष काल में मुख्य लक्ष्मी पूजा। रंगोली बनाएँ, नए कपड़े पहनें, मिठाइयाँ बाँटें और (पर्यावरण-अनुकूल) पटाखे जलाएँ।

व्रत

धनतेरस और मुख्य दिवाली के दिन शाम को लक्ष्मी पूजा तक व्रत रखा जाता है।

स्थानीय रंग

वाराणसी में दिवाली

दिवाली में वाराणसी रोशनी के शहर में बदल जाता है। हर घाट हज़ारों दीयों से जगमगाता है। दिवाली के बाद की पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली देव दीपावली में घाटों पर दस लाख से अधिक दीये जलाए जाते हैं — यह विशुद्ध रूप से वाराणसी की परंपरा है। गंगा पर नाव से दृश्य अविस्मरणीय होता है।

आगे देखें

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