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दिवाली

त्योहार गाइड 4893

दिवाली

दिवाली, दीपों का त्योहार, पाँच दिनों का उत्सव है जो रावण को हराने के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी का प्रतीक है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है।

1047224दिन शेषलक्ष्मी पूजा मुहूर्त

कब पढ़ें

गुरुवार, 10 दिसंबर 4893 – सोमवार, 14 दिसंबर 4893

मुख्य समय

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

उत्सव अवधि

5 दिन का उत्सव

अब आने वाला

1047224 दिन बाद यह पर्व शुरू होगा।

पहले कहानी पढ़ें

समय देखने से पहले पर्व की धड़कन समझें

दिवाली 5 दिनों में खुलता है, इसलिए यहां समय जितना जरूरी है, उतनी ही कहानी भी।

मनाया जाता है

शनिवार, 12 दिसंबर 4893

मुख्य समय

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

उत्सव अवधि

5 दिन का पर्व

दिवाली के 5 दिन

दिन 1गुरु, 10 दिस॰

धनतेरस

धन का त्योहार। देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि इस दिन आयुर्वेद लेकर समुद्र से प्रकट हुए। लोग सोना, चाँदी और बर्तन खरीदते हैं।

अनुष्ठान: सोना/चाँदी खरीदें, दीये जलाएँ, भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा करें

सूर्यास्त: 5:07 अपराह्न

दिन 2शुक्र, 11 दिस॰

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

भगवान कृष्ण ने इस दिन नरकासुर राक्षस का वध किया। लोग सुबह से पहले उठकर तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) करते हैं और दीये जलाते हैं।

अनुष्ठान: भोर से पहले तेल स्नान, 14 दीये जलाएँ, पटाखे फोड़ें

सूर्यास्त: 5:07 अपराह्न

दिन 3शनि, 12 दिस॰

दिवाली (लक्ष्मी पूजा)

दिवाली का मुख्य दिन — दीपों का त्योहार। भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे। समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा होती है।

अनुष्ठान: प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा, दीये और मोमबत्तियाँ जलाएँ, रंगोली, नए कपड़े, मिठाइयाँ

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

5:07 अपराह्न – 6:48 अपराह्न

सूर्यास्त: 5:07 अपराह्न

दिन 4रवि, 13 दिस॰

गोवर्धन पूजा

भगवान कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ग्रामवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया। इसे अन्नकूट भी कहते हैं — भगवान को भोजन का पर्वत अर्पित किया जाता है।

अनुष्ठान: गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएँ, 56 प्रकार के भोजन (छप्पन भोग) बनाएँ, गौ पूजा करें

सूर्यास्त: 5:08 अपराह्न

दिन 5सोम, 14 दिस॰

भाई दूज

भाई-बहन के बंधन का उत्सव। यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना से मिलने गए, जिन्होंने उनके मस्तक पर तिलक लगाया।

अनुष्ठान: बहन भाई के मस्तक पर तिलक लगाए, आरती करे, उपहार और मिठाइयाँ बाँटें

सूर्यास्त: 5:08 अपराह्न

त्योहार का महत्व

यह पर्व स्मृति में क्यों जीवित रहता है

दिवाली, दीपों का त्योहार, पाँच दिनों का उत्सव है जो रावण को हराने के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी का प्रतीक है। यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है।

अनुष्ठान पथ

अनुष्ठान

5 दिन दीये और मोमबत्तियाँ जलाएँ। तीसरे दिन प्रदोष काल में मुख्य लक्ष्मी पूजा। रंगोली बनाएँ, नए कपड़े पहनें, मिठाइयाँ बाँटें और (पर्यावरण-अनुकूल) पटाखे जलाएँ।

अनुशासन

व्रत

धनतेरस और मुख्य दिवाली के दिन शाम को लक्ष्मी पूजा तक व्रत रखा जाता है।

वाराणसी में

जहां शहर अपनी अलग छाप जोड़ता है

दिवाली में वाराणसी रोशनी के शहर में बदल जाता है। हर घाट हज़ारों दीयों से जगमगाता है। 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली देव दीपावली में घाटों पर दस लाख से अधिक दीये जलाए जाते हैं — यह विशुद्ध रूप से वाराणसी की परंपरा है। गंगा पर नाव से दृश्य अविस्मरणीय होता है।