त्योहार गाइड
विजयदशमी (दशहरा) 2027
विजयदशमी (दशहरा) दशानन राक्षस राज रावण पर भगवान राम की विजय और महिषासुर पर देवी दुर्गा की विजय का उत्सव है।
351 दिन शेष
- तिथि
- शनि, 9 अक्टूबर 2027
- मुख्य मुहूर्त
- विजय मुहूर्त · 1:42 – 2:29 अपराह्न
दिन की योजना
शुभ समय और बचने योग्य समय
· वाराणसी का समय (भारतीय समय)
शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त47मि
- ब्रह्म मुहूर्त49मि
- अमृत काल1घं 48मि · अगले दिन
इन समयों से बचें
- दुर्मुहूर्त47मि
- दुर्मुहूर्त47मि
- राहु काल1घं 28मि
- यम गण्डम1घं 28मि · विजय मुहूर्त के समय से टकराता है
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 5:53 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:37 अपराह्न
- चंद्रोदय
- 2:03 अपराह्न
- चंद्रास्त
- 1:03 पूर्वाह्न
पर्व का दिन
शनि, 9 अक्टूबर का पंचांग
- तिथि
- नवमी, फिर दशमी
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा
- योग
- सुकर्म
- करण
- कौलव
- पक्ष
- शुक्ल
- मास
- आश्विन
- तिथि
- नवमीआरंभ समाप्त फिर दशमीसमाप्त
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ाआरंभ समाप्त
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- कालबचें
- शुभउत्तम
- रोगबचें
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
- कालबचें
रात
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
- रोगबचें
- कालबचें
- लाभउत्तम
कहानी
विजयदशमी (दशहरा): महत्व और अनुष्ठान
यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है और हिंदू पंचांग के सबसे शुभ दिनों में से एक है।
अनुष्ठान
विजय मुहूर्त में शमी पूजा और अपराजिता पूजा करें। शस्त्र पूजा करें। रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतले जलाएँ। शमी के पत्ते (सोना) स्वर्ण के रूप में बाँटें।
स्थानीय रंग
वाराणसी में विजयदशमी (दशहरा)
वाराणसी की रामनगर रामलीला — विश्व की सबसे पुरानी और प्रामाणिक — दशहरा पर रामनगर किले में रावण के पुतले के भव्य दहन से समाप्त होती है। हज़ारों लोग किले के मैदान में एकत्र होते हैं। नदी के पार पुराने शहर में कई रामलीला समितियाँ अपने समारोह आयोजित करती हैं।
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