Skip to content
HelloBanaras

त्योहार गाइड

गणेश चतुर्थी 2030

गणेश चतुर्थी ज्ञान, समृद्धि और नई शुरुआत के देवता, गजमुख भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है।

1398 दिन शेष
तिथियाँ
1 – 10 सितंबर 2030 · 10 दिन
मुख्य मुहूर्त
पूजा मुहूर्त · रवि, 1 सितंबर · 10:42 पूर्वाह्न – 1:13 अपराह्न

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त51मि
  • ब्रह्म मुहूर्त45मि
  • अमृत काल1घं 31मि · अगले दिन तक

इन समयों से बचें

  • यम गण्डम1घं 35मि · पूजा मुहूर्त के समय से टकराता है
  • दुर्मुहूर्त51मि
  • राहु काल1घं 35मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
5:38 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
6:17 अपराह्न
चंद्रोदय
8:47 पूर्वाह्न
चंद्रास्त
8:15 अपराह्न

दिन-ब-दिन

गणेश चतुर्थी के 10 दिन

  1. दिन 1मुख्य मुहूर्त · 10:42 पूर्वाह्न – 1:13 अपराह्न

    गणेश चतुर्थी (स्थापना)

    स्थापना दिवस: भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्ति घर या सार्वजनिक पंडाल में लाई जाती है। प्राणप्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजा की जाती है।

    सूर्योदय
    5:38 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:17 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: रवि, 1 सितंबर
  2. दिन 2

    गणेश पंचमी

    दैनिक पूजा जारी। मोदक और लड्डू अर्पित किए जाते हैं। कुछ परिवार 1.5 दिन बाद विसर्जन करते हैं।

    सूर्योदय
    5:39 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:16 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: सोम, 2 सितंबर
  3. दिन 3

    तीसरा दिन

    सामुदायिक उत्सव तेज़ होते हैं। पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और सजावट। कुछ परिवार 3 दिन का विसर्जन करते हैं।

    सूर्योदय
    5:39 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:15 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: मंगल, 3 सितंबर
  4. दिन 4

    चौथा दिन

    भक्त दैनिक आरती और प्रसाद जारी रखते हैं। पंडालों में प्रतियोगिताएँ, संगीत और नृत्य प्रदर्शन होते हैं।

    सूर्योदय
    5:39 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:14 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: बुध, 4 सितंबर
  5. दिन 5

    पाँचवाँ दिन (पंचमी विसर्जन)

    कई घरों में 5 दिन का विसर्जन किया जाता है। भव्य शोभायात्रा में मूर्तियाँ नदी और जलाशयों तक ले जाई जाती हैं।

    सूर्योदय
    5:40 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:13 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: गुरु, 5 सितंबर
  6. दिन 6

    छठा दिन

    बड़े सामुदायिक पंडालों में उत्सव जारी। शाम की आरती और प्रसाद वितरण।

    सूर्योदय
    5:40 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:12 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शुक्र, 6 सितंबर
  7. दिन 7

    सातवाँ दिन (सप्तमी विसर्जन)

    एक और लोकप्रिय विसर्जन दिन। कई पंडालों में सात दिन का उत्सव शोभायात्रा और विदाई अनुष्ठानों के साथ समाप्त होता है।

    सूर्योदय
    5:40 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:11 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शनि, 7 सितंबर
  8. दिन 8

    आठवाँ दिन

    उत्सव के अंतिम दिन। शेष पंडाल भव्य विसर्जन की तैयारी करते हैं। विशेष प्रार्थना और प्रसाद।

    सूर्योदय
    5:41 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:09 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: रवि, 8 सितंबर
  9. दिन 9

    नौवाँ दिन

    उपांत्य दिन। अंतिम आरती और सजावट। समुदाय भव्य अनंत चतुर्दशी विसर्जन शोभायात्रा की तैयारी करते हैं।

    सूर्योदय
    5:41 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:08 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: सोम, 9 सितंबर
  10. दिन 10

    अनंत चतुर्दशी (विसर्जन)

    भव्य समापन: शहरों में विशाल विसर्जन शोभायात्रा। 'गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!' के जयकारों के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।

    सूर्योदय
    5:42 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:07 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: मंगल, 10 सितंबर

गणेश चतुर्थी (स्थापना) का दिन

रवि, 1 सितंबर का पंचांग

तिथि
चतुर्थी, फिर पंचमी
नक्षत्र
हस्त
योग
शुक्ल
करण
वणिज
पक्ष
शुक्ल
मास
भाद्रपद
तिथि
चतुर्थीआरंभ समाप्त फिर पंचमीसमाप्त
नक्षत्र
हस्तआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें
  • रोगबचें
  • शुभउत्तम
  • उद्वेगबचें

रात

  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम

कहानी

गणेश चतुर्थी: महत्व और अनुष्ठान

10 दिनों का यह त्योहार विशेष रूप से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गोवा में भव्य पंडालों और शोभायात्राओं के साथ मनाया जाता है।

अनुष्ठान

घर या सार्वजनिक पंडालों में मिट्टी की गणेश मूर्ति स्थापित करें। प्राणप्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजा करें। मोदक, दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें। 1.5, 5, 7 या 10 दिन बाद मूर्ति विसर्जन करें।

स्थानीय रंग

वाराणसी में गणेश चतुर्थी

वाराणसी में गणेश चतुर्थी घाटों और मोहल्लों में सामुदायिक स्थापनाओं के साथ मनाई जाती है। दशाश्वमेध घाट पर भव्य समारोह होता है। विसर्जन शोभायात्रा पुराने शहर से होकर गंगा तक जाती है।

आगे देखें

गणेश चतुर्थी पर और