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गणेश चतुर्थी

त्योहार गाइड 3267

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी ज्ञान, समृद्धि और नई शुरुआत के देवता, गजमुख भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है। 10 दिनों का यह त्योहार विशेष रूप से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गोवा में भव्य पंडालों और शोभायात्राओं के साथ मनाया जाता है।

453252दिन शेषपूजा मुहूर्त

कब पढ़ें

बुधवार, 14 सितंबर 3267 – शुक्रवार, 23 सितंबर 3267

मुख्य समय

पूजा मुहूर्त

उत्सव अवधि

10 दिन का उत्सव

अब आने वाला

453252 दिन बाद यह पर्व शुरू होगा।

पहले कहानी पढ़ें

समय देखने से पहले पर्व की धड़कन समझें

गणेश चतुर्थी 10 दिनों में खुलता है, इसलिए यहां समय जितना जरूरी है, उतनी ही कहानी भी।

मनाया जाता है

बुधवार, 14 सितंबर 3267

मुख्य समय

पूजा मुहूर्त

उत्सव अवधि

10 दिन का पर्व

दिन 1 / 10
बुध, 14 सित॰

गणेश चतुर्थी (स्थापना)

स्थापना दिवस: भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्ति घर या सार्वजनिक पंडाल में लाई जाती है। प्राणप्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजा की जाती है।

सूर्योदय: 5:45 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:04 अपराह्न
दिन 2 / 10
गुरु, 15 सित॰

गणेश पंचमी

दैनिक पूजा जारी। मोदक और लड्डू अर्पित किए जाते हैं। कुछ परिवार 1.5 दिन बाद विसर्जन करते हैं।

सूर्योदय: 5:46 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:03 अपराह्न
दिन 3 / 10
शुक्र, 16 सित॰

तीसरा दिन

सामुदायिक उत्सव तेज़ होते हैं। पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और सजावट। कुछ परिवार 3 दिन का विसर्जन करते हैं।

सूर्योदय: 5:46 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:02 अपराह्न
दिन 4 / 10
शनि, 17 सित॰

चौथा दिन

भक्त दैनिक आरती और प्रसाद जारी रखते हैं। पंडालों में प्रतियोगिताएँ, संगीत और नृत्य प्रदर्शन होते हैं।

सूर्योदय: 5:46 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 6:00 अपराह्न
दिन 5 / 10
रवि, 18 सित॰

पाँचवाँ दिन (पंचमी विसर्जन)

कई घरों में 5 दिन का विसर्जन किया जाता है। भव्य शोभायात्रा में मूर्तियाँ नदी और जलाशयों तक ले जाई जाती हैं।

सूर्योदय: 5:47 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 5:59 अपराह्न
दिन 6 / 10
सोम, 19 सित॰

छठा दिन

बड़े सामुदायिक पंडालों में उत्सव जारी। शाम की आरती और प्रसाद वितरण।

सूर्योदय: 5:47 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 5:58 अपराह्न
दिन 7 / 10
मंगल, 20 सित॰

सातवाँ दिन (सप्तमी विसर्जन)

एक और लोकप्रिय विसर्जन दिन। कई पंडालों में सात दिन का उत्सव शोभायात्रा और विदाई अनुष्ठानों के साथ समाप्त होता है।

सूर्योदय: 5:47 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 5:57 अपराह्न
दिन 8 / 10
बुध, 21 सित॰

आठवाँ दिन

उत्सव के अंतिम दिन। शेष पंडाल भव्य विसर्जन की तैयारी करते हैं। विशेष प्रार्थना और प्रसाद।

सूर्योदय: 5:48 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 5:56 अपराह्न
दिन 9 / 10
गुरु, 22 सित॰

नौवाँ दिन

उपांत्य दिन। अंतिम आरती और सजावट। समुदाय भव्य अनंत चतुर्दशी विसर्जन शोभायात्रा की तैयारी करते हैं।

सूर्योदय: 5:48 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 5:55 अपराह्न
दिन 10 / 10
शुक्र, 23 सित॰

अनंत चतुर्दशी (विसर्जन)

भव्य समापन: शहरों में विशाल विसर्जन शोभायात्रा। 'गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!' के जयकारों के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।

सूर्योदय: 5:48 पूर्वाह्नसूर्यास्त: 5:54 अपराह्न

त्योहार का महत्व

यह पर्व स्मृति में क्यों जीवित रहता है

गणेश चतुर्थी ज्ञान, समृद्धि और नई शुरुआत के देवता, गजमुख भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है। 10 दिनों का यह त्योहार विशेष रूप से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गोवा में भव्य पंडालों और शोभायात्राओं के साथ मनाया जाता है।

अनुष्ठान पथ

अनुष्ठान

घर या सार्वजनिक पंडालों में मिट्टी की गणेश मूर्ति स्थापित करें। प्राणप्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजा करें। मोदक, दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें। 1.5, 5, 7 या 10 दिन बाद मूर्ति विसर्जन करें।

कैसे समझें

उत्सव की लय

पहले समय पढ़ें, फिर मुख्य अनुष्ठान, फिर स्थानीय संदर्भ, ताकि पर्व की वास्तविक लय समझ आए।

वाराणसी में

जहां शहर अपनी अलग छाप जोड़ता है

वाराणसी में गणेश चतुर्थी घाटों और मोहल्लों में सामुदायिक स्थापनाओं के साथ मनाई जाती है। दशाश्वमेध घाट पर भव्य समारोह होता है। विसर्जन शोभायात्रा पुराने शहर से होकर गंगा तक जाती है।