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त्योहार गाइड

होली 2026

होली बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है — राक्षसी होलिका का दहन और प्रह्लाद की भक्ति।

संपन्न
तिथियाँ
3 – 4 मार्च 2026 · 2 दिन
मुख्य मुहूर्त
होलिका दहन मुहूर्त · मंगल, 3 मार्च · 6:00 – 8:28 अपराह्न

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त47मि
  • ब्रह्म मुहूर्त49मि
  • अमृत काल1घं 36मि · अगले दिन

इन समयों से बचें

  • दुर्मुहूर्त47मि
  • यम गण्डम1घं 28मि
  • राहु काल1घं 28मि
  • दुर्मुहूर्त49मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
6:19 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
6:00 अपराह्न
चंद्रोदय
6:03 अपराह्न

दिन-ब-दिन

होली के 2 दिन

  1. दिन 1मुख्य मुहूर्त · 6:00 – 8:28 अपराह्न

    होलिका दहन

    होलिका के दहन की स्मृति में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में चिता जलाएँ। परिक्रमा करें और नारियल, अनाज और मिठाइयाँ अग्नि को अर्पित करें।

    सूर्योदय
    6:19 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:00 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: मंगल, 3 मार्च
  2. दिन 2

    रंगवाली होली

    रंगों का त्योहार। गुलाल, अबीर और पानी के रंगों से खेलें। राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव। संगीत और नृत्य के साथ सामुदायिक उत्सव।

    सूर्योदय
    6:18 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:01 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: बुध, 4 मार्च

होलिका दहन का दिन

मंगल, 3 मार्च का पंचांग

तिथि
पूर्णिमा, फिर प्रतिपदा
नक्षत्र
मघा
योग
सुकर्म
करण
बव
पक्ष
शुक्ल
मास
फाल्गुन
तिथि
पूर्णिमाआरंभ समाप्त फिर प्रतिपदासमाप्त
नक्षत्र
मघाआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • रोगबचें
  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें
  • शुभउत्तम
  • रोगबचें

रात

  • कालबचें
  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें

कहानी

होली: महत्व और अनुष्ठान

अगले दिन, रंगवाली होली, राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम का रंगों का त्योहार है।

अनुष्ठान

दिन 1 (होलिका दहन): सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन करें। परिक्रमा करें। दिन 2 (रंगवाली होली): रंगों और पानी से खेलें, गुझिया और ठंडाई खाएँ, लोक संगीत पर नाचें।

स्थानीय रंग

वाराणसी में होली

वाराणसी की होली प्रसिद्ध है। उत्सव काशी विश्वनाथ में रंग भरी एकादशी से एक सप्ताह पहले शुरू होता है। हर घाट पर होलिका दहन की आग जलाई जाती है। अगले दिन पूरा शहर रंगों में डूब जाता है, मणिकर्णिका और अस्सी घाट पर विशेष उत्सव होते हैं। भांग वाली ठंडाई विशेष पेय है।

आगे देखें

होली पर और