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त्योहार गाइड

होली 2029

होली बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है — राक्षसी होलिका का दहन और प्रह्लाद की भक्ति।

854 दिन शेष
तिथियाँ
28 फ़रवरी – 1 मार्च 2029 · 2 दिन
मुख्य मुहूर्त
होलिका दहन मुहूर्त · बुध, 28 फ़रवरी · 5:59 – 8:27 अपराह्न

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त50मि
  • अमृत काल1घं 26मि

इन समयों से बचें

  • यम गण्डम1घं 27मि
  • दुर्मुहूर्त47मि
  • राहु काल1घं 27मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
6:22 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
5:59 अपराह्न
चंद्रोदय
5:48 अपराह्न
चंद्रास्त
6:18 पूर्वाह्न

दिन-ब-दिन

होली के 2 दिन

  1. दिन 1मुख्य मुहूर्त · 5:59 – 8:27 अपराह्न

    होलिका दहन

    होलिका के दहन की स्मृति में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में चिता जलाएँ। परिक्रमा करें और नारियल, अनाज और मिठाइयाँ अग्नि को अर्पित करें।

    सूर्योदय
    6:22 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    5:59 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: बुध, 28 फ़रवरी
  2. दिन 2

    रंगवाली होली

    रंगों का त्योहार। गुलाल, अबीर और पानी के रंगों से खेलें। राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव। संगीत और नृत्य के साथ सामुदायिक उत्सव।

    सूर्योदय
    6:21 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:00 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: गुरु, 1 मार्च

होलिका दहन का दिन

बुध, 28 फ़रवरी का पंचांग

तिथि
पूर्णिमा, फिर प्रतिपदा
नक्षत्र
मघा
योग
सुकर्म
करण
विष्टि
पक्ष
शुक्ल
मास
फाल्गुन
तिथि
पूर्णिमाआरंभ समाप्त फिर प्रतिपदासमाप्त
नक्षत्र
मघाआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें
  • रोगबचें
  • शुभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम

रात

  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें

कहानी

होली: महत्व और अनुष्ठान

अगले दिन, रंगवाली होली, राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम का रंगों का त्योहार है।

अनुष्ठान

दिन 1 (होलिका दहन): सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन करें। परिक्रमा करें। दिन 2 (रंगवाली होली): रंगों और पानी से खेलें, गुझिया और ठंडाई खाएँ, लोक संगीत पर नाचें।

स्थानीय रंग

वाराणसी में होली

वाराणसी की होली प्रसिद्ध है। उत्सव काशी विश्वनाथ में रंग भरी एकादशी से एक सप्ताह पहले शुरू होता है। हर घाट पर होलिका दहन की आग जलाई जाती है। अगले दिन पूरा शहर रंगों में डूब जाता है, मणिकर्णिका और अस्सी घाट पर विशेष उत्सव होते हैं। भांग वाली ठंडाई विशेष पेय है।

आगे देखें

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