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त्योहार गाइड

जगन्नाथ रथ यात्रा 2028

जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ उत्सव है।

608 दिन शेष
तिथियाँ
24 जून – 2 जुलाई 2028 · 9 दिन
तिथि
द्वितीया · शुक्र, 23 जून, 9:52 अपराह्न – 7:29 अपराह्न

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त41मि
  • अमृत काल1घं 30मि

इन समयों से बचें

  • दुर्मुहूर्त55मि
  • दुर्मुहूर्त55मि
  • राहु काल1घं 43मि
  • यम गण्डम1घं 43मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
5:09 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
6:51 अपराह्न
चंद्रोदय
6:33 पूर्वाह्न
चंद्रास्त
8:20 अपराह्न

दिन-ब-दिन

जगन्नाथ रथ यात्रा के 9 दिन

  1. दिन 1

    रथ यात्रा

    मुख्य दिन: जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक खींचे जाते हैं। लाखों भक्त रस्सियाँ खींचते हैं। छेरा पहनरा — राजा सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं।

    सूर्योदय
    5:09 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:51 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शनि, 24 जून
  2. दिन 2

    दूसरा दिन (गुंडिचा विश्राम)

    देवता गुंडिचा मंदिर (मौसी का घर) में विश्राम करते हैं। विशेष पूजा और भोग अर्पित किया जाता है। भक्त दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं।

    सूर्योदय
    5:09 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: रवि, 25 जून
  3. दिन 3

    तीसरा दिन (गुंडिचा प्रवास)

    देवता गुंडिचा मंदिर में प्रवास जारी रखते हैं। दैनिक अनुष्ठान, आरती और महाप्रसाद की तैयारी जारी। मंदिर भक्तों के लिए खुला रहता है।

    सूर्योदय
    5:09 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: सोम, 26 जून
  4. दिन 4

    चौथा दिन (गुंडिचा प्रवास)

    गुंडिचा मंदिर में उत्सव जारी। सांस्कृतिक कार्यक्रम और महाप्रसाद के साथ सामुदायिक भोज।

    सूर्योदय
    5:10 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: मंगल, 27 जून
  5. दिन 5

    हेरा पंचमी

    देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ की खोज में गुंडिचा मंदिर जाती हैं। पीछे छोड़े जाने के क्रोध में वे नंदीघोष रथ का एक हिस्सा तोड़ देती हैं। एक चंचल, प्रिय परंपरा।

    सूर्योदय
    5:10 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: बुध, 28 जून
  6. दिन 6

    छठा दिन

    वापसी यात्रा की तैयारी शुरू। गुंडिचा मंदिर में विशेष अनुष्ठान। भक्त प्रार्थना करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।

    सूर्योदय
    5:10 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: गुरु, 29 जून
  7. दिन 7

    संध्या दर्शन

    स्वर्ण आभूषणों (सुना बेशा) से सुसज्जित देवताओं का संध्या दर्शन। संपूर्ण रथ यात्रा उत्सव के सबसे पवित्र दर्शनों में से एक।

    सूर्योदय
    5:11 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शुक्र, 30 जून
  8. दिन 8

    आठवाँ दिन (वापसी पूर्व)

    गुंडिचा मंदिर में अंतिम दिन। विदाई अनुष्ठान। वापसी शोभायात्रा के लिए रथों को तैयार और सजाया जाता है।

    सूर्योदय
    5:11 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: शनि, 1 जुलाई
  9. दिन 9

    बहुदा यात्रा (वापसी)

    भव्य वापसी यात्रा: तीनों रथ गुंडिचा मंदिर से जगन्नाथ मंदिर वापस खींचे जाते हैं। लाखों लोगों की भागीदारी के साथ समान भव्य शोभायात्रा। देवता भव्य उत्सव के साथ घर लौटते हैं।

    सूर्योदय
    5:11 पूर्वाह्न
    सूर्यास्त
    6:52 अपराह्न
    उस दिन का पंचांग: रवि, 2 जुलाई

रथ यात्रा का दिन

शनि, 24 जून का पंचांग

तिथि
द्वितीया, फिर तृतीया
नक्षत्र
पुनर्वसु
योग
ध्रुव
करण
बालव
पक्ष
शुक्ल
मास
आषाढ़
तिथि
द्वितीयाआरंभ समाप्त फिर तृतीयासमाप्त
नक्षत्र
पुनर्वसुआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • कालबचें
  • शुभउत्तम
  • रोगबचें
  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें

रात

  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम

कहानी

जगन्नाथ रथ यात्रा: महत्व और अनुष्ठान

जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथ हज़ारों भक्तों द्वारा सड़कों पर खींचे जाते हैं।

अनुष्ठान

भक्तिपूर्वक रथ खींचें। जगन्नाथ मंदिर में महाप्रसाद पकाएँ। छेरा पहनरा (राजा द्वारा रथों की सफाई) करें। वापसी यात्रा (बहुदा यात्रा) 9वें दिन होती है।

आगे देखें

जगन्नाथ रथ यात्रा पर और