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त्योहार गाइड

कृष्ण जन्माष्टमी 2031

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है।

1734 दिन शेष
तिथि
शनि, 9 अगस्त 2031
मुख्य मुहूर्त
निशीथ पूजा मुहूर्त · 11:42 अपराह्न – 12:25 पूर्वाह्न (अगले दिन)

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त53मि
  • ब्रह्म मुहूर्त43मि

इन समयों से बचें

  • दुर्मुहूर्त53मि
  • दुर्मुहूर्त53मि
  • राहु काल1घं 39मि
  • यम गण्डम1घं 39मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
5:28 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
6:38 अपराह्न
चंद्रोदय
11:01 अपराह्न
चंद्रास्त
11:32 पूर्वाह्न

पर्व का दिन

शनि, 9 अगस्त का पंचांग

तिथि
सप्तमी, फिर अष्टमी
नक्षत्र
अश्विनी
योग
गंड
करण
बव
पक्ष
कृष्ण
मास
भाद्रपद
तिथि
सप्तमीआरंभ समाप्त फिर अष्टमीसमाप्त
नक्षत्र
अश्विनीआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • कालबचें
  • शुभउत्तम
  • रोगबचें
  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें

रात

  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम

कहानी

कृष्ण जन्माष्टमी: महत्व और अनुष्ठान

उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मथुरा के कारागार में मध्यरात्रि (निशीथ काल) में हुआ था।

अनुष्ठान

पूरे दिन व्रत रखें। मंदिर और घरों को फूलों से सजाएँ। मध्यरात्रि (निशीथ काल) में बाल कृष्ण की पूजा करें, छप्पन भोग अर्पित करें, पालना झुलाएँ, व्रत तोड़ें।

व्रत

कड़ा 24 घंटे का व्रत, केवल मध्यरात्रि पूजा के बाद तोड़ा जाता है। कुछ लोग निर्जला (बिना पानी) व्रत रखते हैं।

स्थानीय रंग

वाराणसी में कृष्ण जन्माष्टमी

वाराणसी में जन्माष्टमी बड़े उत्साह से मनाई जाती है। शहर के अनेक कृष्ण मंदिरों में मध्यरात्रि समारोह होते हैं। विभिन्न घाटों पर दही हांडी आयोजित होती है। प्रसिद्ध जन्माष्टमी शोभायात्रा विश्वनाथ गली से गुज़रती है।

आगे देखें

कृष्ण जन्माष्टमी पर और