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कृष्ण जन्माष्टमी

त्योहार गाइड 3864

कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है। उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मथुरा के कारागार में मध्यरात्रि (निशीथ काल) में हुआ था।

671294दिन शेषनिशीथ पूजा मुहूर्त

कब पढ़ें

मंगलवार, 6 सितंबर 3864

मुख्य समय

निशीथ पूजा मुहूर्त

उत्सव अवधि

एक दिन का पर्व

अब आने वाला

671294 दिन बाद यह पर्व शुरू होगा।

पहले कहानी पढ़ें

समय देखने से पहले पर्व की धड़कन समझें

कृष्ण जन्माष्टमी को समझने का सबसे अच्छा तरीका है पहले मुख्य समय पढ़ना, फिर उससे जुड़ी स्थानीय परंपरा को देखना।

मनाया जाता है

मंगलवार, 6 सितंबर 3864

मुख्य समय

निशीथ पूजा मुहूर्त

उत्सव अवधि

एक दिन का पर्व

त्योहार का महत्व

यह पर्व स्मृति में क्यों जीवित रहता है

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है। उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मथुरा के कारागार में मध्यरात्रि (निशीथ काल) में हुआ था।

अनुष्ठान पथ

अनुष्ठान

पूरे दिन व्रत रखें। मंदिर और घरों को फूलों से सजाएँ। मध्यरात्रि (निशीथ काल) में बाल कृष्ण की पूजा करें, छप्पन भोग अर्पित करें, पालना झुलाएँ, व्रत तोड़ें।

अनुशासन

व्रत

कड़ा 24 घंटे का व्रत, केवल मध्यरात्रि पूजा के बाद तोड़ा जाता है। कुछ लोग निर्जला (बिना पानी) व्रत रखते हैं।

वाराणसी में

जहां शहर अपनी अलग छाप जोड़ता है

वाराणसी में जन्माष्टमी बड़े उत्साह से मनाई जाती है। शहर के अनेक कृष्ण मंदिरों में मध्यरात्रि समारोह होते हैं। विभिन्न घाटों पर दही हांडी आयोजित होती है। प्रसिद्ध जन्माष्टमी शोभायात्रा विश्वनाथ गली से गुज़रती है।