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त्योहार गाइड

कांवर यात्रा 2030

श्रावण भर कांवरिये भगवा वस्त्रों में नंगे पाँव चलते हैं, सजी कांवर पर गंगाजल लेकर, जिसे सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है।

1353 दिन शेष
तिथियाँ
16 – 28 जुलाई 2030 · 13 दिन
मुख्य मुहूर्त
निशिता काल पूजा (सावन शिवरात्रि) · रवि, 28 जुलाई · 11:43 अपराह्न – 12:26 पूर्वाह्न (अगले दिन)

दिन की योजना

शुभ समय और बचने योग्य समय

· वाराणसी का समय (भारतीय समय)

शुभ मुहूर्त

  • अभिजित मुहूर्त54मि
  • ब्रह्म मुहूर्त42मि
  • अमृत काल1घं 46मि

इन समयों से बचें

  • यम गण्डम1घं 40मि
  • दुर्मुहूर्त54मि
  • राहु काल1घं 40मि

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
5:23 पूर्वाह्न
सूर्यास्त
6:45 अपराह्न
चंद्रोदय
4:15 पूर्वाह्न
चंद्रास्त
5:04 अपराह्न

पर्व का दिन

रवि, 28 जुलाई का पंचांग

तिथि
त्रयोदशी, फिर चतुर्दशी
नक्षत्र
आर्द्रा
योग
व्याघात
करण
वणिज
पक्ष
कृष्ण
मास
श्रावण
तिथि
त्रयोदशीआरंभ समाप्त फिर चतुर्दशीसमाप्त
नक्षत्र
आर्द्राआरंभ समाप्त

चौघड़िया, दिन और रात

दिन

  • उद्वेगबचें
  • चलसामान्य
  • लाभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • कालबचें
  • रोगबचें
  • शुभउत्तम
  • उद्वेगबचें

रात

  • शुभउत्तम
  • अमृतउत्तम
  • चलसामान्य
  • रोगबचें
  • कालबचें
  • लाभउत्तम
  • उद्वेगबचें
  • शुभउत्तम

कहानी

कांवर यात्रा: महत्व और अनुष्ठान

वाराणसी उन तीर्थयात्रियों के मार्ग पर है जो घाटों से जल भरते हैं, और यात्रा काशी विश्वनाथ पर पूर्ण होती है।

अनुष्ठान

घाट पर कांवर में गंगाजल भरें, पूरी यात्रा में उसे भूमि पर न रखें, नंगे पाँव चलें, और मद्य, मांस तथा केश कर्तन से बचें। सावन शिवरात्रि पर जल शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है।

स्थानीय रंग

वाराणसी में कांवर यात्रा

दशाश्वमेध, अस्सी और केदार घाट मुख्य जल भरने के स्थान हैं। शिवरात्रि से पहले के दिनों में गोदौलिया और विश्वनाथ कॉरिडोर के आसपास भगवा जुलूस, रात्रि यात्रा और भारी मार्ग परिवर्तन की अपेक्षा रखें — सड़क यात्रा के लिए पर्याप्त समय रखें, और अंतिम दो दिनों में पुराने शहर से वाहन न ले जाएँ।

आगे देखें

कांवर यात्रा पर और