त्योहार गाइड
महा शिवरात्रि 2024
महा शिवरात्रि, शिव की महान रात्रि, भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र रात्रि है।
- तिथि
- शुक्र, 8 मार्च 2024
- मुख्य मुहूर्त
- निशीथ काल पूजा · 11:44 अपराह्न – 12:32 पूर्वाह्न (अगले दिन)
दिन की योजना
शुभ समय और बचने योग्य समय
· वाराणसी का समय (भारतीय समय)
शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त47मि
- ब्रह्म मुहूर्त49मि
- अमृत काल1घं 25मि · अगले दिन तक
इन समयों से बचें
- दुर्मुहूर्त47मि
- राहु काल1घं 29मि
- दुर्मुहूर्त47मि
- यम गण्डम1घं 29मि
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 6:14 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 6:03 अपराह्न
- चंद्रोदय
- 5:35 पूर्वाह्न
- चंद्रास्त
- 3:48 अपराह्न
पर्व का दिन
शुक्र, 8 मार्च का पंचांग
- तिथि
- त्रयोदशी, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- श्रवण
- योग
- शिव
- करण
- गर
- पक्ष
- कृष्ण
- मास
- फाल्गुन
- तिथि
- त्रयोदशीआरंभ समाप्त फिर चतुर्दशीसमाप्त
- नक्षत्र
- श्रवणआरंभ समाप्त
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
- कालबचें
- रोगबचें
- शुभउत्तम
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
रात
- रोगबचें
- कालबचें
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
- रोगबचें
कहानी
महा शिवरात्रि: महत्व और अनुष्ठान
यह वह रात्रि है जब शिव ने तांडव नृत्य किया था और रात भर जागरण, व्रत और पूजा के साथ मनाई जाती है।
अनुष्ठान
सूर्योदय से व्रत रखें। रात्रि की चार प्रहर में दूध, दही, शहद और घी से शिव अभिषेक करें। ॐ नमः शिवाय का जाप करें। बेल पत्र, धतूरा और नीले फूल अर्पित करें।
व्रत
कड़ा 24 घंटे का व्रत, अक्सर निर्जला। कुछ लोग केवल फल और दूध लेते हैं। अगली सुबह पूजा के बाद व्रत तोड़ा जाता है।
स्थानीय रंग
वाराणसी में महा शिवरात्रि
शिव की नगरी वाराणसी में महा शिवरात्रि अद्वितीय उत्साह से मनाई जाती है। काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों भक्त आते हैं। भगवान शिव की शाही सवारी पुराने शहर की गलियों से गुज़रती है। वाराणसी का हर शिव मंदिर रोशनी से जगमगाता और भक्तों से भरा होता है।
आगे देखें