त्योहार गाइड
मकर संक्रांति 2030
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश — उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है।
1176 दिन शेष
- तिथि
- सोम, 14 जनवरी 2030
- मुख्य मुहूर्त
- पुण्य काल · 3:37 – 5:28 अपराह्न
दिन की योजना
शुभ समय और बचने योग्य समय
· वाराणसी का समय (भारतीय समय)
शुभ मुहूर्त
- महा पुण्य काल1घं 47मि
- अभिजित मुहूर्त43मि
- ब्रह्म मुहूर्त53मि
इन समयों से बचें
- राहु काल1घं 20मि
- यम गण्डम1घं 20मि
- दुर्मुहूर्त43मि
- दुर्मुहूर्त43मि
सूर्य और चंद्रमा
- सूर्योदय
- 6:45 पूर्वाह्न
- सूर्यास्त
- 5:28 अपराह्न
- चंद्रोदय
- 1:07 अपराह्न
- चंद्रास्त
- 2:52 पूर्वाह्न
पर्व का दिन
सोम, 14 जनवरी का पंचांग
- तिथि
- दशमी, फिर एकादशी
- नक्षत्र
- भरणी
- योग
- शुभ
- करण
- गर
- पक्ष
- शुक्ल
- मास
- पौष
- तिथि
- दशमीआरंभ समाप्त फिर एकादशीसमाप्त
- नक्षत्र
- भरणीआरंभ समाप्त
चौघड़िया, दिन और रात
दिन
- अमृतउत्तम
- कालबचें
- रोगबचें
- शुभउत्तम
- उद्वेगबचें
- चलसामान्य
- लाभउत्तम
- अमृतउत्तम
रात
- चलसामान्य
- रोगबचें
- कालबचें
- लाभउत्तम
- उद्वेगबचें
- शुभउत्तम
- अमृतउत्तम
- चलसामान्य
कहानी
मकर संक्रांति: महत्व और अनुष्ठान
यह पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है: पोंगल (तमिलनाडु), लोहड़ी (पंजाब), बिहू (असम), उत्तरायण (गुजरात)।
अनुष्ठान
सूर्योदय पर नदियों में पवित्र स्नान करें। पतंग उड़ाएँ (विशेषकर गुजरात और राजस्थान में)। तिल-गुड़ के लड्डू बनाएँ। दक्षिण भारत में कोलम/रंगोली बनाएँ और पोंगल चावल पकाएँ।
स्थानीय रंग
वाराणसी में मकर संक्रांति
वाराणसी में मकर संक्रांति पर घाटों पर गंगा स्नान के लिए भारी भीड़ होती है। शहर के आसमान में पतंगबाज़ी होती है। हर घाट और मंदिर पर तिल-गुड़ की मिठाइयाँ बांटी जाती हैं।
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