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त्योहार गाइड 2026

सावन सोमवार

श्रावण का हर सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, और काशी में — उन्हीं की नगरी में — सावन सोमवार का व्रत काशी विश्वनाथ में वर्ष की सबसे लंबी दर्शन कतारें लाता है। श्रद्धालु दिन भर व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र और दूध चढ़ाते हैं, और संध्या पूजा के बाद व्रत खोलते हैं।

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त्योहार का महत्व

यह पर्व स्मृति में क्यों जीवित रहता है

श्रावण का हर सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, और काशी में — उन्हीं की नगरी में — सावन सोमवार का व्रत काशी विश्वनाथ में वर्ष की सबसे लंबी दर्शन कतारें लाता है। श्रद्धालु दिन भर व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र और दूध चढ़ाते हैं, और संध्या पूजा के बाद व्रत खोलते हैं।

अनुष्ठान पथ

अनुष्ठान

सूर्योदय से पहले स्नान करें, यथासंभव गंगा में। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें। ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। संध्या आरती के बाद एक सात्विक भोजन करें।

अनुशासन

व्रत

दिन भर का व्रत, संध्या पूजा के बाद खोला जाता है। कई लोग केवल पहले सोमवार को निर्जला व्रत रखते हैं; अन्यथा फल और दूध लिए जा सकते हैं।

वाराणसी में

जहां शहर अपनी अलग छाप जोड़ता है

काशी विश्वनाथ में कतारें मंगला आरती से बहुत पहले लगने लगती हैं और दिन भर गोदौलिया तक फैली रहती हैं। भोर से पहले कॉरिडोर पहुँचें, कम सामान रखें, और गेट पर फोन जमा करने की अपेक्षा रखें। आसपास के शिव मंदिर — मृत्युंजय महादेव, तिलभांडेश्वर और केदारेश्वर — सोमवार दर्शन के लिए कहीं शांत रहते हैं।