Skip to content
वापस
गुप्त संख्यासंख्या पद्धतिआसान

पिंगल का द्विआधारी

संस्कृत छंद के लघु और गुरु अक्षर एक द्विआधारी कोड हैं — संख्या पढ़ लें।

हल किया हुआ उदाहरण

पिंगल की परंपरा छंदों को लघु (L) और गुरु (H) अक्षरों से लिखती थी — एक द्विआधारी कोड जिसमें H = 1, L = 0, बाएँ से दाएँ स्थानीय मान के रूप में पढ़ा जाता है। इस लय को पूर्ण संख्या में बदलें: H H H।

खुद आज़माएँ

यह क्यों काम करता है

गुरु = 1, लघु = 0, बाएँ से दाएँ स्थानीय मान — ठीक द्विआधारी निरूपण, छंदों की गणना के लिए।

पृष्ठभूमि और और जानें

पिंगल की परंपरा (छंदशास्त्र) ने यूरोप से बहुत पहले द्विआधारी गणना और मेरु-प्रस्तार (पास्कल त्रिभुज) का प्रयोग किया।

और जानें: Kim Plofker, Mathematics in India

पिंगल का द्विआधारी — गणित का जादू | हैलोबनारस