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पिंगल का द्विआधारी
संस्कृत छंद के लघु और गुरु अक्षर एक द्विआधारी कोड हैं — संख्या पढ़ लें।
हल किया हुआ उदाहरण
पिंगल की परंपरा छंदों को लघु (L) और गुरु (H) अक्षरों से लिखती थी — एक द्विआधारी कोड जिसमें H = 1, L = 0, बाएँ से दाएँ स्थानीय मान के रूप में पढ़ा जाता है। इस लय को पूर्ण संख्या में बदलें: H H H।
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यह क्यों काम करता है
गुरु = 1, लघु = 0, बाएँ से दाएँ स्थानीय मान — ठीक द्विआधारी निरूपण, छंदों की गणना के लिए।
पृष्ठभूमि और और जानें
पिंगल की परंपरा (छंदशास्त्र) ने यूरोप से बहुत पहले द्विआधारी गणना और मेरु-प्रस्तार (पास्कल त्रिभुज) का प्रयोग किया।