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काशी के प्राचीन मंदिरों की एक दिन की यात्रा: संकट मोचन से दुर्गा मंदिर और घाटों तक

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

वाराणसी में इतने मंदिर हैं कि यात्री गिनते-गिनते थक जाएं, इसलिए एक सुनियोजित मार्ग से आप एक ही दिन में काशी के पवित्र हृदय को महसूस कर सकते हैं। एक लोकप्रिय मार्ग शहर के दक्षिणी भाग से शुरू होकर धीरे-धीरे गंगा तट की ओर बढ़ता है, जिसमें प्राचीन मंदिर, शांत उद्यान और अंत में घाटों की संध्या आरती शामिल है। यात्रा संकट मोचन मंदिर से शुरू करें, जो हनुमान जी को समर्पित है और जिसकी स्थापना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी। मंगलवार और शनिवार को यहाँ सबसे अधिक भीड़ होती है और यहाँ का लड्डू प्रसाद पूरे शहर में प्रसिद्ध है। थोड़ी दूरी पर श्वेत संगमरमर से बना तुलसी मानस मंदिर है, जहाँ मान्यता है कि तुलसीदास ने रामचरितमानस लिखी थी; इसकी दीवारों पर चौपाइयाँ अंकित हैं। ठीक बगल में अठारहवीं सदी का लाल रंग का दुर्गा मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग मंकी टेंपल भी कहते हैं, अपने सुंदर कुंड और नागर शैली के शिखर के साथ। वहाँ से त्रिदेव मंदिर और शांत इस्कॉन मंदिर जाएँ, जो दोपहर में विश्राम के लिए उपयुक्त हैं। कई श्रद्धालु इसी रास्ते पर श्री सत्यनारायण मंदिर भी जाते हैं। शाम ढलते गोदौलिया की गलियों से होते हुए दशाश्वमेध घाट पहुँचें और गंगा आरती देखें, फिर नदी के किनारे उत्तर की ओर चलकर मणिकर्णिका घाट तक जाएँ, जहाँ सदियों से पवित्र अग्नि प्रज्वलित है। कुछ उपयोगी सुझाव: सादे और शालीन कपड़े पहनें, आसानी से उतरने वाले जूते-चप्पल रखें, चढ़ावे के लिए खुल्ले पैसे साथ रखें और गर्भगृह में फोटो न लें। ऑटो और ई-रिक्शा से मंदिरों के बीच आना-जाना आसान है, और शाम के भोजन के लिए गोदौलिया में बनारसी थाली या कचौड़ी-सब्ज़ी सबसे अच्छा विकल्प है। आराम से की गई यह यात्रा काशी की भक्ति, स्थापत्य और रोज़मर्रा के जीवन की सुंदर झलक देती है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: