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देव दीपावली 2026: गंगा की लहरों से काशी के 84 घाटों की रोशनी देखने की पूरी तैयारी

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

हर साल कार्तिक पूर्णिमा को, दीपावली के लगभग पंद्रह दिन बाद, काशी में देव दीपावली मनाई जाती है, जिसे देवताओं की दिवाली कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात देवता स्वयं गंगा में स्नान करने उतरते हैं, और उनके स्वागत में शहर के सभी 84 घाटों पर लाखों मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। वर्ष 2026 में यह पर्व नवंबर के अंतिम सप्ताह में पड़ रहा है, और यात्रियों तथा नाव संचालकों के बीच इसकी तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। देव दीपावली का सबसे सुंदर अनुभव गंगा की लहरों से होता है। छोटी लकड़ी की नावें हमेशा से इस परंपरा का हिस्सा रही हैं, लेकिन अब रविदास घाट और नमो घाट की ओर से बड़े क्रूज़ भी विशेष शाम की सैर कराते हैं। क्रूज़ से घाटों की पूरी अर्धचंद्राकार कतार एक साथ दिखती है, जहाँ एक-एक करके दीये जलते हैं और उसके बाद नदी के ऊपर लेज़र शो और आतिशबाज़ी होती है। जिन परिवारों में बुज़ुर्ग साथ होते हैं, वे प्रायः बड़ी नाव पसंद करते हैं क्योंकि उनमें चढ़ने-उतरने की सुविधाजनक व्यवस्था, स्थिर डेक और भोजन की सुविधा होती है। कुछ व्यावहारिक बातें शाम को और सहज बना देती हैं। लोकप्रिय क्रूज़ की बुकिंग काफी पहले खुल जाती है और जल्दी भर जाती है, इसलिए समय रहते आरक्षण करें और अलग-अलग संचालकों की नावों के आकार व किराए की तुलना कर लें। रिपोर्टिंग का समय आमतौर पर दोपहर बाद का होता है क्योंकि शाम से पहले घाटों के आसपास की सड़कें वाहनों के लिए बंद कर दी जाती हैं, इसलिए ई-रिक्शा या पैदल ही बोर्डिंग स्थल तक पहुँचने की योजना बनाएँ। नदी की ठंडी हवा के लिए हल्का शॉल रखें और तस्वीरों के लिए फ़ोन चार्ज रखें। बहुत से यात्री इस यात्रा को अगली सुबह काशी विश्वनाथ के दर्शन से जोड़ते हैं। सुगम दर्शन की बुकिंग लगभग 45 दिन पहले खुलती है और उसी दिन मंदिर मार्ग के हेल्प डेस्क से भी टिकट लिया जा सकता है। दीयों की शाम और दर्शन की सुबह, दोनों मिलकर देव दीपावली को काशी के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बना देते हैं।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: