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लक्सा में चालीस शामों के भजन: झूलेलाल मंदिर में सिंधी समाज का चालीहा महोत्सव

जानकारीपूर्ण पोस्ट · हैलोबनारस द्वारा संकलित

इस महीने शाम को लक्सा से गुज़रते हुए आपने भजन सुने हों, तो वे यहीं से आ रहे हैं। यहाँ के झूलेलाल मंदिर में चालीहा महोत्सव चल रहा है — भगवान झूलेलाल के लिए सिंधी समाज का चालीस दिन का अनुष्ठान। उत्सव अपना पैंतीसवाँ दिन पार कर चुका है, यानी समापन के दिन नज़दीक हैं। हर शाम का क्रम तय है। प्रतिमाओं के समक्ष दीप जलते हैं, समाज की महिलाएँ भजन गाती हैं, और बात झूलेलाल तथा भगवान विष्णु की भव्य आरती तक पहुँचती है, जिसके बाद प्रसाद वितरण होता है। सिंधी पकवान बनकर पहले भगवान को अर्पित होते हैं, और झूलेलाल के साथ माता हिंगलाज का स्मरण भी होता है। आयोजन पूज्य झूलेलाल भक्त सेवा समिति कर रही है। पैंतीसवें दिन मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' पहुँचे। काशी ने हमेशा अलग-अलग समाजों को जगह दी है और उनका अपना पंचांग भी चलने दिया है। यह उसी का एक शांत उदाहरण है — एक सिंधी पर्व, जिसे बनारस के मुहल्ले में स्थायी शाम मिल गई है। सुनना हो तो चालीस दिनों का यह आख़िरी हिस्सा सबसे अच्छा समय है।

हैलोबनारस द्वारा सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार: KTV Varanasi